
रायपुर / VSK ऐप की तकनीकी विफलता और शिक्षकों पर एकतरफा दंडात्मक कार्रवाई का विरोध करते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग में अजीबोगरीब तानाशाही का माहौल है। विष्णुदेव साय सरकार का ’विद्या समीक्षा केंद्र’ (VSK) ऐप पूरी तरह फुस्स हो चुका है। ग्रामीण और बस्तर-सरगुजा-जांजगीर चांपा के क्षेत्रों में नेटवर्क रहता नहीं, सर्वर घंटों ठप रहता है, लेकिन सजा शिक्षकों को दी जा रही है। सरकार अपनी तकनीकी नाकामी और आईटी अव्यवस्था को सुधारने के बजाय गुरुजनों का वेतन रोककर, उन्हें नोटिस देकर उनका मानसिक उत्पीड़न कर रही है। कांग्रेस पार्टी इस दंडात्मक कार्रवाई का कड़ा विरोध करती है और मांग करती है कि जब तक ऐप पूरी तरह सुगम न हो, ऑनलाइन हाजिरी के नाम पर शिक्षकों पर उत्पीड़न बंद किया जाए।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि भाजपा सरकार VSK (Vidya Samiksha Kendra) ऐप के जरिए डिजिटल गवर्नेंस और पारदर्शी हाजिरी का ढिंढोरा पीट रही है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि राज्य के दूरस्थ व ग्रामीण इलाकों (बस्तर, सरगुजा आदि) में नेटवर्क कनेक्टिविटी की भारी समस्या है। ऐप के बार-बार क्रैश होने और सर्वर डाउन रहने के कारण शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं हो पा रही है। तकनीकी बुनियादी ढांचे (Server/Network Infrastructure) को मजबूत किए बिना और ऐप की कमियों को सुधारे बिना शिक्षकों का वेतन रोकना, शो-कॉज नोटिस थमाना या निलंबन की कार्रवाई करना पूर्णतः प्रशासनिक तानाशाही है। सरकार अपनी तकनीकी नाकामी का ठीकरा शिक्षकों पर फोड़ रही है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि शिक्षकों का मानसिक उत्पीड़न हो रहा है, जिससे अध्यापन कार्य प्रभावित हो रहा है। अंततः इसका सीधा नुकसान सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब और ग्रामीण बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान ’पढ़ई तुंहर दुआर’ जैसी डिजिटल पहलों में कभी भी शिक्षकों के प्रति दंडात्मक रवैया नहीं अपनाया गया, बल्कि शिक्षकों को सम्मान देकर और संवाद स्थापित करके व्यवस्था को सुधारा गया था। वर्तमान सरकार में टैज्ञ ऐप के निर्माण, उसके मेंटेनेंस और सर्वर ठेके में हुए संभावित भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी को छुपाने शिक्षकों पर ठीकरा फोड़ा जा रहा है। ’खुद का सर्वर फेल, और शिक्षकों का वेतन सील?’ यह तो सरासर नाइंसाफी है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि छत्तीसगढ़ी स्वाभिमान और शिक्षक सम्मान जनहित में अति आवश्यक है, हम अनुशासन के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन ऐप की तकनीकी खराबी के कारण समय पर पहुंचे शिक्षक को गैर-हाजिर ठहराना और उनका वेतन काटना सरासर अन्याय है। जब राज्य के सैकड़ों गांवों में 4G/5G कनेक्टिविटी ही नहीं है, तो बिना नेटवर्क मैपिंग के VSK ऐप से अनिवार्यता थोपने का तुक क्या है? ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविकताओं, नेटवर्क की कमी से अनभिज्ञ होकर रायपुर के एसी कमरों में बैठकर फरमान जारी करना छत्तीसगढ़ के शिक्षकों का अनादर है। पहले ऐप सुधारो, फिर फरमान निकालो। अपनी तकनीकी नाकामी छुपाने शिक्षकों को बलि का बकरा बना रही है भाजपा सरकार।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि VSK ऐप और उसके सर्वर मेंटेनेंस पर कितने करोड़ रुपये खर्च किए गए, और सर्वर बार-बार क्रैश होने पर उस आईटी कंपनी पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? समय पर स्कूल पहुंचकर भी सिर्फ ऐप की तकनीकी खराबी के कारण ’अनुपस्थित’ दर्ज होने वाले शिक्षकों का वेतन काटना क्या प्रशासनिक गुंडागर्दी नहीं है? क्या सरकार का काम शिक्षा का स्तर सुधारना है या दिन-भर शिक्षकों को मोबाइल में नेटवर्क खोजते रहने के लिए मजबूर करना? क्या साय सरकार इस बात की गारंटी देगी कि जब तक ऐप 100 प्रतिशत सुचारू नहीं होता, तब तक किसी भी शिक्षक का वेतन नहीं रोका जाएगा?



