
सावन की शुक्ल पक्ष की पंचमी को नाग पंचमी मनाई जाती है। इस साल साल नाग पंचमी इस दिन घर और मंदिर दोनों में नाग देवता की पूजा की जाती है। श्रद्धालु इस दिन नाग देवता की पूजाकर दूध एवं धान के लावा का भोग लगाकर घर परिवार के लोगों की रक्षा एवं सुख-समृद्धि की कामना करते है। नाग पंचमी पर काल सर्प दोष के निवारण के लिए भी पूजा की जाती है। इस दिन घर में भी नाग देवता की आकृति बनाई जाती है। ऐसा कहा जाता है कि नागपंचमी पर नागों की पूजा करने से सर्पदंश का भय समाप्त हो जाता है।
कब है नाग पंचमी
इस साल नाग पंचमी 28 जुलाई रात 11:24 मिनट से शुरू होगी और 30 जुलाई सुबह 12:46 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में उदया तिथि के कारण 29 जुलाई के दिन नाग पंचमी कापर्व मनाया जाएगा। शुभ मुहूर्त सुबह 5:41 मिनट से 8:23 मिनट तक रहेगा।

नाग पंचमी का दिन कालसर्पदोष के निवारण के लिए खास
नागपंचमी के दिन लोग कालसर्पदोष के निवारण के लिए पूजा भी करते हैं। इस दिन शिवजी को नाग नागिन का जोड़ा भी चढ़ाना चाहिए। इसके अलावा नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने और विशेष अनुष्ठान करने से इस दोष से मुक्ति मिलती है या व्यक्ति को इससे राहत मिलती है। जिन जातकों के जन्मकुंडली में कालसर्प योग दोष विद्यमान होता हैं वह आगे नहीं बढ़ पाता है। रोज की लाइफ में तमाम प्रकार की समस्याओं से घिरा रहता है। ऐसे लोगों को कालसर्प योग दोष शांति करवानी चाहिए। इसके लिए आप किसी योग्य पंडित से कालसर्प दोष पूजा के लिए राहु-केतू का हवन करा सकते हैं। इस दोष से बचने के लिए इस दिन लहसुनिया और गौमेद रत्न पहना जाता है। कालसर्प दोष की पूजा से बचने के लिए भगवान शिव की रोज पूजा करनी चाहिए। आपको बता दें कि यह पूजा विशेष रूप से त्र्यंबकेश्वर, नासिक, उज्जैन और हरिद्वार जैसे पवित्र स्थानों पर की जाती है। इसमें भगवान शिव, राहु-केतु और नवग्रहों की विशेष पूजा की जाती है जिससे इस दोष का असर कम होता है।



