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चारामा में आबादी जमीनों की खरीद-फरोख्त में अघोषित व बेनामी संपत्ति खपाने का खेल? जांच के घेरे में राजस्व रिकॉर्ड

चारामा /कांकेर

नगर में इन दिनों आबादी जमीनों की खरीदी-बिक्री को लेकर संदिग्ध गतिविधियों की चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय स्तर पर ऐसी आशंकाएं जताई जा रही हैं कि कुछ बड़े कारोबारी अपनी करोड़ों की अघोषित नकदी को खपाने के लिए जमीन सौदों का सहारा ले रहे हैं। हालांकि, इन मामलों में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सामने आए कुछ दस्तावेज और राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव कई बड़े सवाल खड़े कर रहे हैं।

राजस्व रिकॉर्ड में छेड़छाड़ के मिल रहे हैं संकेत

सूत्रों के अनुसार, नगर के प्रमुख इलाकों में स्थित आबादी भूमि के राजस्व अभिलेखों में बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के नामांतरण (म्यूटेशन) किए जाने के मामले सामने आए हैं। आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर नए खरीदारों के नाम रिकॉर्ड में जोड़े गए।
इस प्रक्रिया में कुछ राजस्व विभाग के कर्मचारियों की संभावित संलिप्तता भी चर्चा में है, जिससे प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।

अघोषित धन को वैध बनाने का तरीका

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के लेन-देन “बेनामी” या अघोषित धन को वैध बनाने के प्रयास का हिस्सा हो सकते हैं। ऐसे मामलों पर रोक लगाने के लिए कई तरह के प्रभावी नियम भी लागू है, जिसके तहत आबादी जमीनों को किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर गैर-सरकारी ढंग से खरीदना अपराध है।
इसके अलावा, आयकर विभाग द्वारा अघोषित आय पर कार्रवाई के लिए प्रावधान भी लागू होते हैं, जिसमें भारी जुर्माना और सजा का प्रावधान है।

भू-राजस्व नियमों का उल्लंघन

भूमि रिकॉर्ड में बदलाव के लिए संबंधित सक्षम अधिकारी को भू-राजस्व संहिता के नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। राज्य में यह राजस्व प्रक्रिया के तहत नियंत्रित होती है।
किसी भी नामांतरण के लिए सक्षम अधिकारी की स्वीकृति, दस्तावेज सत्यापन और सार्वजनिक सूचना जैसी प्रक्रियाएं आवश्यक हैं। इन नियमों का उल्लंघन गंभीर प्रशासनिक और आपराधिक कार्रवाई को जन्म दे सकता है।

प्रशासन की भूमिका पर सवाल

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि इन मामलों की निष्पक्ष जांच की जाए तो बड़े स्तर पर अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है। वहीं, राजस्व विभाग के अधिकारियों ने ऐसे मामलों में अपनी औपचारिक प्रतिक्रिया देने से परहेज किया है।

जांच की मांग तेज

नगर में इस मुद्दे को लेकर अब जांच की मांग उठने लगी है। सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह प्रवृत्ति आगे और बढ़ सकती है, जिससे राजस्व प्रणाली की विश्वसनीयता पर बुरा असर पड़ेगा।

निष्कर्ष

चारामा में जमीन सौदों के जरिए अघोषित संपत्ति खपाने के आरोप बेहद गंभीर हैं, लेकिन इनकी पुष्टि के लिए आधिकारिक जांच जरूरी है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल आर्थिक अपराध का मामला होगा, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की खामियों को भी उजागर करेगा।

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