
साबित हो गया ज्ञानेश कुमार भाजपा के कठपुतली – कांग्रेस
रायपुर/23 सितंबर 2026। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ऊपर लगाये गये आरोप प्रमाणित हो रहे है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की टिप्पणियों से साफ हो गया है कि चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद के दायित्वों का निर्वहन निष्पक्ष रूप से नहीं कर रहे है। उन्होंने एसआईआर में मतदाताओं का नाम दोषपूर्ण तरीके से करवाया, उनके निर्देशन में किया गया, एसआईआर दोषपूर्ण है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पंद्रह महीने से भी पहले वोट चोरी का मुद्दा उठाया था। आज उनकी बात पहले से भी सही साबित हुई है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि देश के एक प्रतिष्ठित अखबार चुनाव आयुक्त संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में एसआईआर में मतदाताओं के नाम हटाने और जोड़ने में 14 मौकों पर लिखित आपत्तियां व्यक्त किया तथा टिप्पणियां किया लेकिन उनको नजरअंदाज कर दिया गया। यह सारे तथ्य आयोग के रिकार्ड में है जबकि आयोग का काम बहूमत के आधार पर चलता है ऐसे में दो आयुक्तों की आपत्तियां दरकिनार किया जाना, बताता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त अपनी मनमानी चला रहे है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि ज्ञानेश कुमार ने केंद्रीय गृह मंत्री के इशारे पर काम करने वाली कठपुतली की भूमिका निभाई है और गृह मंत्री खुद प्रधानमंत्री की इच्छाओं को पूरा करने के लिए नियुक्त हैं। सीईसी जो कुछ कर रहे हैं, वह प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की पूरी जानकारी और समर्थन से हो रहा है। दरअसल, यह सब उन्हीं के इशारे पर किया जा रहा है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ने अपने संवैधानिक पद की गरिमा को पूरी तरह धूमिल कर दिया है। उनकी नीयत की ईमानदारी, निष्पक्षता और स्वतंत्र रूप से काम करने की क्षमता हमेशा से ही बेहद संदिग्ध रही है। 24 अप्रैल 2026 को विपक्ष के 73 सांसदों ने उन्हें पद से हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव पेश किया था, जो अब भी लंबित है। इस बीच, आज उनके अपने ही दो सहयोगियों ने उन्हें पूरी तरह एक्सपोज कर दिया है। इसमें कोई संदेह नहीं कि यदि संसद का विशेष सत्र बुलाया जाता है, तो दोनों सदनों में विपक्षी सांसद उन्हें पद से हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव पेश करेंगे।



