
रायपुर-बलौदा-सारंगढ़ फोरलेन सिर्फ कागजों और क्रेडिट तक ही सीमित – कांग्रेस
बीते ढ़ाई साल में दर्जनों बार श्रेय ले चुके, मामला सर्वे से आगे नहीं बढ़ा, धरातल पर कब उतरेगा?
रायपुर/23 सितंबर 2026। केंद्रीय सड़क परियोजनाओं पर केवल श्रेय की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि रायपुर- बलौदाबाजार-सारंगढ़ फोरलेन, एनएच-130 बी, छत्तीसगढ़ की उन प्रमुख सड़क परियोजनाओं में से एक है जिसका श्रेय तो भाजपा की डबल इंजन सरकार विगत ढाई वर्षों से लगातार ले रही है, लेकिन धरातल पर काम दिख नहीं रहा है। जुलाई 2024 से यह सरकार बार-बार जनता को बड़ी सौगात देने का अहसान जता रही है, लेकिन काम की रफ्तार कछुए से भी धीमी है। सवा दो साल में तो सड़क का निर्माण पूरा हो जाना चाहिए था लेकिन अब तक यह सरकार सर्वे, डीपीआर और अधिग्रहण का काम तक पूरा नहीं कर पाई है। सरकार के खोखले वायदे और झूठे दावों से स्थानीय जनता में बेहद आक्रोश है, लंबे समय तक यह परियोजना धरातल पर आने के बजाय सिर्फ ‘कागजों और क्रेडिट’ तक ही सीमित रही है, जिसके चलते असंतोष बढ़ रहा है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में तमाम केंद्रीय योजनाओं का लगभग यही हाल है। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने रायपुर से राजनांदगांव होकर हैदराबाद नया हाईवे बनाने के नाम पर वोट मांगा, स्वीकृति का भी दावा किया और चुनाव जीतने के बाद उस परियोजना को ही अकारण निरस्त कर दिया। नया रायपुर अटल नगर में नए एम्स के लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस की सरकार के समय से ही जमीन अधिग्रहित करके केंद्र को सौंपी जा चुकी है लेकिन आज तक निर्माण शुरू ही नहीं किया गया, अब तक एक ईंट नहीं रखी गई है। छत्तीसगढ़ की जनता ने लोकसभा में भाजपा के 10 सांसदों को चुनकर भेजा है लेकिन जब छत्तीसगढ़ के हक़ और अधिकारों की बात आती है तो भाजपा के नेता दलीय चाटुकारिता में मौन हो जाते हैं।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि साल 2024 के मध्य में जब रायपुर-बलौदाबाजार-सारंगढ़ मार्ग को फोरलेन बनाने के प्रस्ताव को कथित तौर पर प्रारंभिक रूप से हरी झंडी मिली, तब राज्य के पीडब्ल्यूडी मंत्री अरुण साव और क्षेत्रीय विधायक और राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा के द्वारा केंद्रीय मंत्रियों का आभार जताते हुए बड़े स्तर पर इसका श्रेय लिया गया। विज्ञापन, सोशल मीडिया और होल्डिंग में लोकधन का अपव्यय किया गया, दर्जनों बयान और विज्ञप्ति जारी हुए लेकिन कार्यादेश नहीं हुआ जिसका इंतजार आम जनता को अब तक है। लंबे समय तक डीपीआर सर्वे के फाइनल न होने, वन विभाग की मंजूरियों, बिजली पोल शिफ्टिंग और जमीन अधिग्रहण में देरी की जा रही है। 3 ए नोटिफिकेशन की प्रक्रियाओं को जानबूझकर विलंब किया जा रहा है, तरह-तरह के रोड़े अटकाए जा रहे हैं। 1500 करोड़ के बजट का दावा था अब तक केवल 7 करोड़ ही जारी हो पाया है, परियोजना आज तक सर्वे के स्तर से आगे नहीं बढ़ पाई है। सरकार के इच्छाशक्ति नहीं होने की वजह से ही इस महत्वपूर्ण सड़क का वास्तविक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा था।



