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नदीयों को औद्योगिक अपशिष्ट की नाली बना कर जल संरक्षण में नंबर वन बताना भद्दा मज़ाक है -कांग्रेस

फर्जी पुरस्कारों और कागजी दावों के पीछे है जल-भ्रष्टाचार? जल संरक्षण का ढोंग कर रही है सरकार

 

रायपुर / “जल संचय जन भागीदारी 3.0” में देशभर में प्रथम स्थान हासिल करने के दावों को भद्दा मज़ाक बताते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि सरकार की कॉरपोरेट परस्त नीतियों के चलते छत्तीसगढ़ की नदियां औद्योगिक प्रदूषण से लाल हो चुकी है और यह सरकार जश्न मना रही है। छत्तीसगढ़ की जनता आज बूंद-बूंद स्वच्छ पानी के लिए तरस रही है, हमारी जीवनदायिनी नदियां औद्योगिक कचरे से विकृत और जहरीली हो चुकी हैं। लेकिन विष्णुदेव साय सरकार विज्ञापनों में छत्तीसगढ़ को जल संरक्षण में ‘नंबर वन’ बताकर राज्य की जनता के साथ क्रूर मजाक कर रही है। यह सरकार संरक्षण नहीं, बल्कि जल स्रोतों का विनाश कर रही है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की नरवा योजना बंद कर नदियों को उद्योगपतियों के हवाले करने वाली भाजपा सरकार फर्जी पुरस्कारों और कागजी दावों के पीछे अपना जल-भ्रष्टाचार छुपाने का कुत्सित प्रयास कर रही है, जल संरक्षण का ढोंग करके नदियों को प्रदूषित करने के महापाप से छुटकारा पाना चाहती है। जमीनी हकीकत यह है कि बस्तर बैलाडीला की नदियां शबरी, शंखिनी-डंकिनी, इंद्रावती, हसदेव, शिवनाथ और केलो नदी में बढ़ता औद्योगिक कचरा, रेड वाटर एवं जल जीवन मिशन में भ्रष्टाचार से आम जनता, किसान, आदिवासी समाज, पर्यावरण प्रेमी एवं स्थानीय निवासीयों का जीवन प्रभावित हो रहा है। औद्योगिक प्रदूषण से लाल हो चुकी नदियों का दूषित पानी जल संरक्षण के सरकारी दावों की पोल खोलती है

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि भाजपा सरकार जल संरक्षण और स्वच्छ जल का ‘नंबर वन’ होने का ढोल पीट रही है, जबकि हकीकत यह है कि बस्तर से लेकर रायगढ़ तक नदियां प्रदूषण से ‘लाल पानी’ और जहरीले रसायनों का शिकार हो चुकी हैं। पर्यावरण संरक्षण मंडल (CECB) पंगु बना हुआ है। उद्योगपतियों पर कोई कड़ी कार्रवाई नहीं हो रही है। बजट में जल निकायों के पुनरुद्धार की योजनाएं कागजों तक सीमित हैं। ग्रामीण और आदिवासी समाज दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। फसलों को नुकसान पहुंच रहा है और जल जनित बीमारियों का खतरा चरम पर है। भाजपा सरकार में नदी लाल, नीयत काली है जल संरक्षण के नाम पर भाजपा सिर्फ प्रचार की दुकानदारी दुकानदारी चला रही है, असल में प्रदेश के जीवनदयिनी नदियों का अस्तित्व गंभीर संकट में है।

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