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थोड़ी मदद, थोड़े अनुभव ने मोतिन को बनाया लखपति दीदी

बकरी, मुर्गीपालन व सूरजमुखी की खेती ने बनाया आर्थिक रूप से समृद्ध

उत्तर बस्तर कांकेर, / जीवन में सकारात्मक परिवर्तन के लिए थोड़ी मदद और सही दिशा में आगे बढ़ने की ललक होना बहुत आवश्यक है। महिलाओं में यह परिवर्तन समूह से जुड़ाव के बाद देखने को मिल रहा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन समूह में गठित महिलाओं को सही दिशा और दशा की ओर ले जा रहा है। विभिन्न व्यवसायों के माध्यम से समूह की महिलाएं आज लखपति दीदी बन गई हैं। जिले के भानुप्रतापपुर के ग्राम हाटकर्रा के मां दुर्गा स्वसहायता समूह की श्रीमती मोतिन दर्रो भी बकरीपालन, मुर्गीपालन और सूरजमुखी की खेती करके लखपति दीदियों की सूची में अपना नाम दर्ज करा लिया है।
जिला मुख्यालय से 26 किलोमीटर दूर ग्राम हाटकर्रा का मां दुर्गा स्वसहायता समूह की महिलाएं आर्थिक, सामाजिक और पारिवारिक रूप से अपनी पृथक पहचान स्थापित कर ली हैं। समूह की सदस्य श्रीमती मोतिन दर्रो ने बताया कि समूह में जुड़ने से पहले उनके आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी, थोड़े पैसों के लिए परिवार और अन्य लोगों पर आश्रित होना पड़ता था। बिहान योजना के बारे मंे पता चलने पर गांव की 10 महिलाओं सहित वह समूह से जुड़ गईं। श्रीमती दर्रो ने बताया कि समूह से जुड़ने के बाद नियमित रूप से बैठक कर बचत शुरू किया और बचत की राशि से परस्पर लेनदेन करना प्रारंभ किया। वहीं आजीविकामूलक गतिविधियों से जुड़ने के लिए बैंक से 02 लाख रूपए की राशि ऋण के रूप में प्राप्त हुई। इसके बाद बीपीएम, पीआरपी आदि के मार्गदर्शन में कृषि कार्य (सब्जी उत्पादन), कपड़े का व्यवसाय, ईंट निर्माण आदि कार्य प्रारंभ किया। उन्होंने यह भी बताया कि इसके पश्चात वह पीछे मुड़कर नहीं देखी और ठोस आजीविका के रूप में बकरीपालन, मुर्गीपालन और सूरजमुखी की खेती शुरू की। इससे उन्हें 01 लाख 30 हजार रूपए की वार्षिक आमदनी होने लगी। श्रीमती दर्राे ने बताया कि इस लाभांश राशि का उपयोग परिवार के भरण-पोषण व बच्चों की पढ़ाई में कर रही हैं। इस तरह समूह से जुड़कर शासन की छोटी सी मदद और थोड़े अनुभव ने उन्हें तथा समूह की अन्य महिलाओं को लखपति दीदी बना दिया। आज वह आर्थिक, पारिवारिक और सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर और समृद्ध बन चुकी हैं।

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