
जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ में मानसून के सक्रिय होते ही कई जिलों में भारी बारिश का दौर जारी है। लगातार हो रही बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर आ गए हैं और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की परेशानी बढ़ गई है। इसी बीच जांजगीर-चांपा जिले में एक बांध क्षतिग्रस्त होने से हालात गंभीर हो गए हैं। पानी के तेज बहाव के कारण लीलागर नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है।
अकलतरा ब्लॉक के कोटमी सोनार क्षेत्र के कर्रा नाला बांध का गेट शुक्रवार को तेज पानी के दबाव में टूट गया। बांध के मेढ़ और गेट के क्षतिग्रस्त होने के बाद बड़ी मात्रा में पानी नहर के रास्ते लीलागर नदी में पहुंच गया, जिससे नदी में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं।

कई गांवों पर मंडराया खतरा
बांध टूटने के बाद आसपास के कई गांव प्रभावित हुए हैं। प्रशासन के अनुसार—
- कोटमी सोनार
- बड़े अमेरी
- छोटे अमेरी
सहित आसपास के क्षेत्रों में पानी का असर देखने को मिला है।
नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद नदी किनारे रहने वाले ग्रामीणों में डर का माहौल बन गया। स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने तुरंत राहत और बचाव अभियान शुरू किया।
100 लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया
हालात बिगड़ते देख प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। करीब 100 लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित जगह ले जाया गया और उनके लिए स्कूल में राहत शिविर बनाया गया है।
राहत शिविर में प्रशासन की ओर से—
- रहने की व्यवस्था
- भोजन
- पेयजल
- आवश्यक सुविधाएं
उपलब्ध कराई जा रही हैं।
कलेक्टर और एसपी ने मौके पर पहुंचकर लिया जायजा
बांध क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन सक्रिय हो गया। कलेक्टर जन्मेजय महोबे, पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय और जल संसाधन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे।
अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर स्थिति की जानकारी ली। कलेक्टर ने जल संसाधन विभाग को तत्काल बांध की मरम्मत के निर्देश दिए हैं।
तेज बहाव के कारण मरम्मत में परेशानी
प्रशासन ने बांध सुधारने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश तो दे दिए हैं, लेकिन पानी के तेज बहाव के कारण मरम्मत कार्य में मुश्किलें आ रही हैं।
फिलहाल प्रशासन और संबंधित विभाग की टीमें लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। नदी के जलस्तर और प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी की जा रही है।
लोगों से सतर्क रहने की अपील
प्रशासन ने नदी और नालों के आसपास रहने वाले लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। ग्रामीणों को सलाह दी गई है कि—
- जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहें।
- नदी किनारे जाने से बचें।
- प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
- किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सूचना दें।
मानसून में बढ़ा खतरा
बारिश के मौसम में बांध, नदी और नालों में पानी का दबाव बढ़ जाता है। जांजगीर-चांपा की यह घटना बताती है कि भारी बारिश के दौरान प्रशासन और ग्रामीणों को लगातार सतर्क रहने की जरूरत है। फिलहाल जिला प्रशासन स्थिति को नियंत्रित करने में जुटा हुआ है और प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।



