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शिक्षा विभाग बना वसूली गिरोह युक्तिकरण में स्थानांतरित शिक्षको मे से अनेकों का पुनः तबादला

80 प्रतिशत शिक्षकों के ट्रांसफर उन्हीं स्कूलों में, जहाँ शिक्षक पहले से पर्याप्त थे, 2461 एकल शिक्षकीय स्कूल सरकार की प्राथमिकता में नहीं

रायपुर/ शिक्षकों के ट्रांसफरों, नवीन पदस्थापनाओं, युक्तियुक्तकरण और उस दौरान भ्रष्टाचार के लगे आरोपों की उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से निष्पक्ष जांच कराएं जाने की मांग करते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और स्कूलों के युक्तियुक्तकरण का ढोंग रच रही है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि शिक्षा विभाग एक वसूली गिरोह की तरह काम कर रहा है। युक्तियुक्तकरण में नाम पर पूर्व में स्थानांतरित शिक्षकों में से अनेकों का पुनः तबादला प्राइम लोकेशन पर स्थित स्कूलों में कर दिया गया है। विगत 2 वर्षों में हुए शिक्षकों और प्राचार्य के 16,165 ट्रांसफरों में से मात्र 3,512 अर्थात 21.7 प्रतिशत ही एकल शिक्षकीय स्कूलों में भेजे गए। बाकी 78.3 प्रतिशत अर्थात 12,653 पदस्थापनाएं पारदर्शी प्रक्रिया के बजाय बोली लगाकर बेची गईं। भाजपा की सरकार शिक्षा का स्तर सुधारने के नाम पर प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। आज स्थिति यह है कि शिक्षा विभाग, विभाग न रहकर एक वसूली गिरोह में तब्दील हो चुका है। जिन स्कूलों में पहले से शिक्षक हैं उन्हीं प्राइम लोकेशन पर पैसे लेकर ट्रांसफर किया जा रहा है, प्रदेश के 2,461 स्कूल आज भी शिक्षक विहीन या एकल शिक्षकीय हैं, ये स्कूल सरकार की प्राथमिकता में है ही नहीं, हजारों पद खाली हैं, लेकिन साय सरकार ने नियमित शिक्षक भर्ती पर पूरी तरह रोक लगा रखी है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि सुदृढ़ करने के बजाय ट्रांसफर-पोस्टिंग का बड़ा कारोबार खड़ा किया गया। 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान मोदी की गारंटी के नाम पर 57 हजार नियमित शिक्षकों की भर्ती का वायदा किया गया था, तत्कालीन शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने 33 हजार शिक्षकों की भर्ती की घोषणा विधानसभा में किया, वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने 25 हजार शिक्षकों की भर्ती की घोषणा की अब मुख्यमंत्री से 5 हजार में आ गए लेकिन अब तक भर्ती की ही नहीं गई। आज भी प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के हजारों पद खाली हैं और हर महीने शिक्षक सेवानिवृत्त हो रहे हैं, फिर भी सरकार ने नई नियमित भर्तियों पर ताला लगा रखा है, इसका सबसे बड़ा नुकसान गाँव-देहात, आदिवासी और गरीब वर्ग के बच्चों को हो रहा है, जिन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित किया जा रहा है। सरकार सरकारी स्कूलों को जानबूझकर पंगु बना रही है ताकि शिक्षा का निजीकरण किया जा सके।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी व हिंदी माध्यम स्कूल खोलकर हर वर्ग के बच्चे को विश्वस्तरीय मुफ़्त शिक्षा दी थी और हजारों शिक्षकों की पारदर्शी भर्ती की थी। वहीं भाजपा सरकार ने आते ही शिक्षा के बजट और व्यवस्था को केवल श्तबादला उद्योगश् का जरिया बना दिया है। साय सरकार में शिक्षा विभाग अब ज्ञान का मंदिर नहीं, बल्कि तबादला और वसूली का बाजार बन चुका है। साय सरकार में शिक्षकों के उन 16 हजार से अधिक स्थानांतरण पदस्थापनाओं में हुए करोड़ों के लेन-देन की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि क्या छत्तीसगढ़ के गरीब और आदिवासी बच्चों को पढ़ने का अधिकार नहीं है? 2,461 एकल शिक्षकीय स्कूल भाजपा के प्रशासनिक पतन का सबसे बड़ा सबूत हैं, ट्रांसफर और नवीन पदस्थापना में इन स्कूलों के रिक्त पदों को प्राथमिकता से क्यों नहीं भरे गए? यदि ट्रांसफर और युक्तियुक्तकरण प्रशासनिक प्रक्रिया थी, तो 80 प्रतिशत ट्रांसफर उन स्कूलों में क्यों हुए जहाँ शिक्षक पहले से पर्याप्त थे? एकल शिक्षकीय स्कूलों में शिक्षक क्यों नहीं पहुँचे? हर महीने शिक्षक सेवानिवृत्त हो रहे हैं और पद खाली पड़े हैं, फिर सरकार नई नियमित शिक्षक भर्तियों को क्यों दबाकर बैठी है? क्या भाजपा सरकार योजनाबद्ध तरीके से सरकारी स्कूलों को बदहाल करके निजी स्कूल माफियाओं को फायदा पहुँचाना चाहती है?

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