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शिक्षा के मंदिर को ‘सेवा संकल्प’ के नाम पर भाजपा का चुनाव कार्यालय न बनाएं, स्कूली बच्चों, शिक्षक और अभिभावकों को झूठे प्रचार में झोंकना अनुचित – दीपक बैज

रायपुर /‘सेवा संकल्प अभियान’ के नाम पर प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग, सभी जिला शिक्षा अधिकारी और ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों द्वारा जारी सरकारी फरमान को शिक्षा व्यवस्था पर सीधा हमला बताते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी इस जनविरोधी और बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले आदेश की कड़े शब्दों में निंदा करती है और सरकार से इसे तत्काल वापस लेने की मांग करती है। छत्तीसगढ़ की साय सरकार अपनी प्रशासनिक नाकामी और केंद्र के झूठे दावों को छुपाने के लिए अब राज्य के मासूम स्कूली बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों को राजनीतिक प्रोपोगंडा में झोंक रही है। भाजपा नेताओं के पास अपनी उपलब्धि बताने के लिए कुछ है नहीं तो अब पढ़ाई छोड़ स्कूली बच्चों और शिक्षकों से गली मोहल्लों में झूठा प्रचार कराना चाहते हैं।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार और प्रशासन से सवाल करते हुए कहा है कि क्या अब छत्तीसगढ़ के स्कूलों का इस्तेमाल पढ़ाई के लिए नहीं, बल्कि भाजपा के राजनीतिक प्रचार के लिए होगा? शिक्षकों का काम बच्चों को पढ़ाना है या भाजपा सरकार के आयोजनों के लिए भीड़ जुटाना? जर्जर स्कूल भवनों, छात्रावास और शिक्षकों की कमी से जूझ रहे विभागों के पास इस राजनीतिक इवेंट के लिए फंड कहाँ से आ रहा है? क्या बच्चों और अभिभावकों पर राजनीतिक कार्यक्रमों में शामिल होने का दबाव बनाना उनके मौलिक अधिकारों का हनन नहीं है? अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए मासूम नौनिहालों को ढाल बनाना क्या भाजपा की नीति और नियत को उजागर नहीं करता? सरकार बच्चों को राजनीतिक एजेंडे में धकेल रही है। हम किसी भी हाल में हमारे छत्तीसगढ़ के नौनिहालों का भविष्य भाषणबाजी की बलि नहीं चढ़ने देंगे। बच्चों का काम पढ़ना है, भाजपा का झूठा प्रचार सुनना और सुनाना नहीं।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि अगर जागरूकता फैलानी है तो गिरती शिक्षा व्यवस्था, बार-बार हो रहे पेपर लीक, अनाप-शनाप फीस बढ़ोत्तरी, बेरोजगारी और छात्रवृत्ति के बकाए पर श्वेतपत्र जारी करें, बच्चों की क्लास क्यों बंद करवा रहे हैं? केंद्र की मोदी सरकार ने विगत 10 वर्षों में 94 हजार से अधिक सरकारी स्कूलों को बंद किया है, छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने पिछले एक साल में 10463 स्कूल बंद किए हैं, सभी सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के न्यूनतम पदों की संख्या में कटौती करके 54 हजार से ज्यादा नियमित शिक्षकों के पदों को समाप्त कर दिया है, नई भर्ती रोक रखी है, 260 स्कूल शिक्षक विहीन हैं, 12 हजार से अधिक स्कूल एकल शिक्षक के भरोसे छोड़ दिया गया है, स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट स्कूलों को बर्बाद कर दिया गया है, सरकारी स्कूल की छतें टपक रही है, शौचालय उपयोग के लायक नहीं रहे, किताब, कापी, गणवेश और छात्रवृत्ति दे नहीं पा रहे लेकिन सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करके राजनैतिक इवेंट करना इतना जरूरी हो गया है कि बच्चों और अभिभावकों पर अनिवार्य उपस्थिति तथा प्रोपेगैंडा में शामिल होने का प्रशासनिक दबाव बनाया जा रहा है। शिक्षा का मंदिर भाजपा का चुनाव कार्यालय नहीं है, ‘सेवा संकल्प’ के नाम पर नौनिहालों का शोषण बंद करे सरकार।

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