
दवा और डॉक्टर के बिना अस्पताल खाली हैं, भाजपा सरकार के दावे पूरी तरह जाली हैं- कांग्रेस
रायपुर / प्रदेश में डॉक्टरों के 80 प्रतिशत पद रिक्त होने से चौपट हो चुकी स्वस्थ व्यवस्था और ब्लैकलिस्टेड कंपनियों से दवा खरीदी पर सवाल उठाते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से वेंटिलेटर पर है। राज्य भर में स्वाइन फ्लू, मलेरिया और डायरिया जैसी बीमारियां नियंत्रण से बाहर हो चुकी हैं। दवा, डॉक्टर और उचित इलाज के अभाव में आम जनता बेमौत मरने पर मजबूर है। भाजपा सरकार विज्ञापनों में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के दावे कर रही है, लेकिन हकीकत में प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दवाओं, डॉक्टरों और आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की भारी कमी से जूझ रहे हैं। ग्रामीण और आदिवासी अंचलों से लेकर शहरी इलाकों तक इलाज के अभाव में मौतें हो रही हैं। साय सरकार की प्राथमिकता जनता की जान बचाना नहीं, बल्कि झूठे विज्ञापनों और बैठकों तक सीमित रह गई है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि भाजपा सरकार की दुर्भावना के चलते धरातल पर चिकित्सा व्यवस्था चिंताजनक हो चुकी है। भ्रष्टाचार और सरकार के नीतिगत कमियों की वजह से स्वास्थ्य सेवा बदहाल है। स्वास्थ्य बजट के क्रियान्वयन में लापरवाही, आपातकालीन दवाओं की खरीद में प्रशासनिक देरी, और मौसमी बीमारियों को लेकर कोई पूर्व-तैयारी न होना इस सरकार की मुख्य नाकामी है। खराब मशीनों का मरम्मत तक नहीं हो रहा है, अस्पतालों में वेंटिलेटर, आइसोलेशन वार्ड और जांच किट उपलब्ध नहीं हैं, जिसका नुकसान आम जनता भोग रही है। गरीब, मजदूर, आदिवासी और ग्रामीण आबादी सबसे ज्यादा प्रभावित है। इलाज के लिए लोग निजी अस्पतालों के कर्ज में डूब रहे हैं या इलाज के अभाव में जान गंवा रहे हैं। पूर्ववर्ती कांग्रेस की सरकार के दौरान श्श्री धन्वंतरी जेनेरिक मेडिकल स्टोरश्, श्मुख्यमंत्री हाट-बाजार क्लिनिक योजनाश्, और श्शहरी स्लम स्वास्थ्य योजनाश् के जरिए स्वास्थ्य सेवाएं सीधे जनता के द्वार तक पहुँच रही थीं। भाजपा शासन में ये योजनाएं सुस्त पड़ चुकी हैं।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि भाजपा की संवेदनहीनता से ही छत्तीसगढ़ में ‘‘स्वास्थ्य संकट’’ उपजा है, आम जनता इलाज के बिना जनतादम तोड़ रही है। आयुष्मान योजना के भुगतान बकाया होने की वजह से निजी अस्पताल कार्ड से इलाज़ करने में कोताही बरत रहे हैं। सरकार की नाकामी और संवेदनहीनता के कारण प्रदेश में ष्हेल्थ इमरजेंसीष् जैसे हालात बन गए हैं। प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों, नर्सों और जीवन रक्षक दवाओं की भारी कमी के लिए कौन जिम्मेदार है? हकीकत यह है कि दवा और डॉक्टर के बिना सरकारी अस्पताल खाली हैं, भाजपा सरकार के दावे पूरी तरह जाली हैं।



