
देश में पहली बार नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में शहीद हुए जवानों की जानकारी को डिजिटल रूप से सुरक्षित किया जा रहा है। बस्तर के दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जैसे इलाकों में शहीद जवानों की तस्वीरों के साथ QR कोड लगाए जा रहे हैं।
इन्हें स्कैन करने पर आम नागरिक मोबाइल पर संबंधित शहीद की पूरी जानकारी देख सकेंगे। इसके साथ ही जिन स्थानों पर जवानों ने शहादत दी, वहां की मिट्टी भी संग्रहित की जा रही है।


जहां जवानों ने शहादत दी, वहां की मिट्टी भी संग्रहित की जा रही है।
2000 से 2026 तक 1280 जवानों ने दी कुर्बानी
बस्तर के दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जिले… ये वही इलाके हैं, जिन्हें कभी देश के सबसे संवेदनशील नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में गिना जाता था। इन इलाकों में नक्सलियों के बड़े हमले हुए। पूरे संभाग में सन 2000 से 2026 तक लगभग 1280 जवानों ने अपनी कुर्बानी दी। लंबे समय तक यहां सुरक्षा बलों के लिए ऑपरेशन चलाना बड़ी चुनौती रहा, लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है।
इन्हीं इलाकों से तिरंगा यात्रा निकाली जा रही है। खास बात यह है कि यह यात्रा सिर्फ मुख्य सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन इलाकों तक पहुंच रही है, जहां कभी नक्सलियों का प्रभाव था और जहां सुरक्षा बलों के खिलाफ बड़े हमले हुए थे।
तिरंगा यात्रा के दौरान शहीद स्थलों पर पहुंचकर जवानों को श्रद्धांजलि दी जा रही है। इन जगहों की मिट्टी भी संग्रहित की जा रही है। इसका उद्देश्य उन स्थानों को याद रखना है, जहां देश की सुरक्षा के लिए जवानों ने अपनी जान दी।

शहीद जवानों की तस्वीरों के साथ QR कोड लगाए जा रहे हैं।
शहीद जवानों की तस्वीर के साथ लगाया जा रहा QR कोड
बस्तर संभाग में साल 2000 से 2026 तक करीब 1280 जवानों की शहादत हुई है। ये सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है। इस संख्या के पीछे 1280 परिवारों की अपनी-अपनी कहानी है। किसी ने अपना बेटा खोया, किसी ने पति, किसी ने पिता। इन जवानों ने ऐसे समय में ड्यूटी की, जब बस्तर के कई इलाके नक्सलियों के प्रभाव वाले माने जाते थे।
अब कोशिश है कि इन शहादतों को सिर्फ आंकड़ों तक सीमित न रखा जाए। हर शहीद की कहानी लोगों तक पहुंचे, यही इस डिजिटल पहल का उद्देश्य है। भविष्य में जब कोई व्यक्ति इन इलाकों में बने शहीद स्मारक तक पहुंचेगा तो वह सिर्फ जवान का नाम नहीं देखेगा।
वह QR कोड स्कैन करके यह भी जान सकेगा कि उस जवान ने कहां ड्यूटी की, किस घटना में शहादत दी और बस्तर की शांति के लिए उसका क्या योगदान रहा।

हर शहीद की कहानी लोगों तक पहुंचे, यही इस डिजिटल पहल का उद्देश्य है।
डिजिटल होगी शहीदों की जानकारी
बस्तर के ताड़मेटला, रानी बोदली, मिपना, बुरकापाल, जैसे बड़े हमलों में बड़ी संख्या में जवान शहीद हुए हैं। दंतेवाड़ा, नारायणपुर, सुकमा और बीजापुर जिले में ज्यादा शहादतें हुई हैं। इन घटनाओं के बाद जिन इलाकों को कभी नक्सलियों के प्रभाव वाले क्षेत्र के तौर पर देखा जाता था, वहां अब सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हुई है। अब उन्हीं क्षेत्रों से तिरंगा यात्रा निकाली जा रही है।
शहीद स्थलों की मिट्टी संजोई
इस पहल के जरिए उन जगहों को भी तिरंगा यात्रा से जोड़ा जा रहा है, जहां जवानों ने देश की सुरक्षा के लिए अपनी जान दी। शहीद स्मारक पर पहुंचने वाले युवाओं को अब वहां लगे QR कोड से संबंधित जवान की पूरी जानकारी मिल सकेगी।
कोई युवा शहीद स्मारक पर पहुंचता है और जवान के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं जानता, तो वह मोबाइल कैमरे से QR कोड स्कैन कर सकेगा। कुछ ही सेकंड में शहीद की तस्वीर, नाम और उससे जुड़ी पूरी जानकारी मोबाइल पर सामने आ जाएगी।
भविष्य की पीढ़ियों को मिलेगी जानकारी
आने वाली पीढ़ी शहीदों की जानकारी QR कोड के जरिए डिजिटल रूप से हासिल कर सकेगी। शहीद स्मारकों पर तस्वीर और QR कोड लगाए जाएंगे, जिन्हें स्कैन करने पर संबंधित शहीद की जानकारी मोबाइल पर उपलब्ध होगी।
तिरंगा यात्रा दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा के उन इलाकों से होकर गुजरेगी, जो लंबे समय तक नक्सल हिंसा से प्रभावित रहे हैं। यात्रा के दौरान शहीद स्थलों पर श्रद्धांजलि दी जाएगी और वहां की मिट्टी भी संग्रहित की जाएगी। साथ ही शहीदों



