
छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में जैविक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला स्तरीय किसान मेले का आयोजन किया गया। जैविक खेती मिशन योजना के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री Shyam Bihari Jaiswal मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में किसानों को रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों से अवगत कराते हुए जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
किसान सम्मेलन में बड़ी संख्या में किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कांकेर विधायक Aasharam Netam ने की।

जैविक खेती समय की जरूरत: स्वास्थ्य मंत्री
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों को जैविक खेती की ओर प्रेरित कर रही है। उन्होंने कहा कि अधिक उत्पादन की दौड़ में रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग मिट्टी की उर्वरता को नुकसान पहुंचा रहा है।
उन्होंने किसानों से अपील की कि वे छोटे स्तर से जैविक खेती की शुरुआत करें और धीरे-धीरे इसे व्यापक रूप से अपनाएं। उनके अनुसार गांवों से शुरू होने वाला यह बदलाव भविष्य में कृषि क्षेत्र को नई दिशा देगा।
फसल परिवर्तन पर मिलेगा 15 हजार रुपये प्रति एकड़
कार्यक्रम में किसानों को राज्य सरकार की विभिन्न कृषि योजनाओं की जानकारी भी दी गई।
किसानों के लिए बड़ी घोषणा
- पिछले वर्ष धान की खेती करने वाले किसान यदि इस वर्ष मक्का, दलहन, तिलहन या अन्य फसलें लेते हैं तो उन्हें 15 हजार रुपये प्रति एकड़ की सहायता मिलेगी।
- पात्र किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ मिलता रहेगा।
- किसानों की आय बढ़ाने के लिए विविध फसल उत्पादन को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
यह पहल फसल विविधीकरण और मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी बड़ी जानकारी
स्वास्थ्य मंत्री ने कांकेर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की जानकारी देते हुए बताया कि जल्द ही जिले में एमआरआई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे मरीजों को जांच के लिए दूसरे जिलों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
उन्होंने बताया कि:
- कांकेर में मेडिकल कॉलेज भवन का निर्माण जारी है।
- बस्तर संभाग के Dantewada में नए मेडिकल कॉलेज की स्थापना की दिशा में भी कार्य चल रहा है।
- स्वास्थ्य सुविधाओं को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
प्रगतिशील किसानों का हुआ सम्मान
किसान मेले में जैविक खेती, दलहन-तिलहन उत्पादन, जल संरक्षण और पशुपालन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 10 प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया।
सम्मान स्वरूप किसानों को:
- शॉल
- नारियल का पौधा
भेंट कर सम्मानित किया गया।
इसके अलावा 5 किसानों को स्थानीय प्रसिद्ध चिरईनखी धान के बीज भी वितरित किए गए।
चिरईनखी धान संरक्षण पर विशेष जोर
चिरईनखी धान कांकेर जिले की पारंपरिक और स्थानीय धान किस्म है, जो अपनी विशेष सुगंध और स्वाद के लिए प्रसिद्ध है।
संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयास
- बीज उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
- किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
- कृषि विज्ञान केंद्र कांकेर को बीज उत्पादन की जिम्मेदारी दी गई है।
- पारंपरिक धान प्रजातियों को संरक्षित करने की योजना पर काम चल रहा है।
किसानों को मिले विशेषज्ञों के सुझाव
कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों और प्रगतिशील कृषकों ने किसानों को जैविक खेती की तकनीक, प्राकृतिक खाद निर्माण, जल संरक्षण और कम लागत वाली खेती के तरीकों की जानकारी दी।
विशेषज्ञों ने बताया
- जैविक खेती से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है।
- उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर होती है।
- बाजार में जैविक उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है।
- खेती की लागत कम की जा सकती है।



