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बीजापुर में 4300 बच्चे स्कूल से बाहर! शिक्षा विभाग का घर-घर अभियान, कलेक्टर ने की बड़ी अपील

बीजापुर जिले में शिक्षा को लेकर एक बड़ी चुनौती सामने आई है। जिले में करीब 4300 बच्चे अभी भी शिक्षा से वंचित हैं। इनमें स्कूल छोड़ चुके (शाला त्यागी) और कभी स्कूल में प्रवेश नहीं लेने वाले बच्चे शामिल हैं। इस स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग ने विशेष अभियान शुरू किया है। इसके तहत अधिकारी, कर्मचारी और शिक्षक घर-घर जाकर बच्चों को स्कूल से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।

बीजापुर कलेक्टर विश्वदीप ने जिलेवासियों और अभिभावकों से अपील करते हुए कहा है कि हर बच्चे को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। शिक्षा ही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और उनके सर्वांगीण विकास की मजबूत नींव है।

4300 बच्चों को स्कूल पहुंचाने की बड़ी मुहिम

कलेक्टर विश्वदीप ने बताया कि जिले में शिक्षा विभाग द्वारा विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य उन बच्चों को स्कूल तक पहुंचाना है जो किसी कारणवश पढ़ाई से दूर हो गए हैं।

अभियान के तहत:

  • शिक्षक घर-घर जाकर सर्वे कर रहे हैं।
  • अभिभावकों से व्यक्तिगत संपर्क किया जा रहा है।
  • शाला त्यागी बच्चों की पहचान की जा रही है।
  • नए बच्चों का स्कूल में प्रवेश सुनिश्चित किया जा रहा है।
  • शिक्षा के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाई जा रही है।

प्रशासन का लक्ष्य है कि जिले का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र से शिक्षा की नई शुरुआत

बीजापुर लंबे समय तक नक्सल प्रभावित जिला रहा है। सुरक्षा कारणों से कई स्कूल और आश्रम अपने मूल स्थानों से हटाकर अन्य क्षेत्रों में संचालित किए जा रहे थे।

अब जिले में हालात सामान्य होने और क्षेत्र के नक्सलमुक्त होने के बाद स्कूलों एवं आश्रमों को फिर से उनके मूल स्थानों पर संचालित किया जा रहा है।

इससे कई महत्वपूर्ण लाभ होंगे:

  • बच्चों को अपने गांव के नजदीक शिक्षा मिलेगी।
  • स्कूल तक पहुंच आसान होगी।
  • पढ़ाई छोड़ने की समस्या कम होगी।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर बेहतर होगा।
  • अभिभावकों का भरोसा बढ़ेगा।

शिक्षा है बच्चों का अधिकार

कलेक्टर ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है। शिक्षा केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है बल्कि यह बच्चों को बेहतर नागरिक बनने और जीवन में आगे बढ़ने का अवसर देती है।

उन्होंने कहा कि यदि कोई बच्चा स्कूल से दूर रह जाता है तो उसका भविष्य प्रभावित हो सकता है। इसलिए समाज के हर व्यक्ति को इस अभियान में सहयोग करना चाहिए।

शिक्षा से मिलने वाले प्रमुख लाभ

  • बेहतर भविष्य के अवसर
  • रोजगार की संभावनाओं में वृद्धि
  • सामाजिक जागरूकता
  • आत्मविश्वास का विकास
  • गरीबी से बाहर निकलने का मार्ग
  • समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान

अभिभावकों से की गई विशेष अपील

प्रशासन ने सभी अभिभावकों से आग्रह किया है कि वे अपने बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजें और शिक्षा विभाग के अभियान में सहयोग करें।

कलेक्टर विश्वदीप ने कहा कि जनभागीदारी के बिना इस लक्ष्य को हासिल करना संभव नहीं है। यदि समाज और प्रशासन मिलकर काम करें तो जिले का हर बच्चा स्कूल तक पहुंच सकता है।

जनसहयोग से बदलेगी तस्वीर

बीजापुर में चलाया जा रहा यह अभियान केवल सरकारी पहल नहीं, बल्कि शिक्षा के माध्यम से भविष्य निर्माण का मिशन है। जिला प्रशासन को विश्वास है कि लोगों के सहयोग से जल्द ही सभी शाला त्यागी और अप्रवेशी बच्चों को स्कूलों से जोड़ा जा सकेगा।

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