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आंगनबाड़ी और स्वास्थ्य केंद्र बन रहा धर्मांतरण का हॉट स्पॉट, धर्मांतरण से इंकार करने वालों को झूठे मामलों में फंसाने की षड्यंत्र – ग्रामीणों ने की शिकायत

कांकेर / चारामा / जिला उत्तर बस्तर कांकेर के अंतर्गत तहसील चारामा स्थित ग्राम बड़ाटोला में अवैध धर्मांतरण गतिविधियों, महिलाओं को धमकी देने एवं शासकीय तंत्र के दुरुपयोग के विरोध में आज सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों ने संगठित रूप से जिला कार्यालय पहुंचकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।
कलेक्टर महोदय की अनुपस्थिति में यह ज्ञापन अनुविभागीय अधिकारी श्री अरुण वर्मा को तथा पुलिस अधीक्षक की अनुपस्थिति में सहायक पुलिस अधीक्षक को प्रस्तुत किया गया।
ज्ञापन में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ग्राम में कुछ व्यक्तियों द्वारा संगठित रूप से धर्मांतरण का प्रयास किया जा रहा है, जिसमें विशेष रूप से महिलाओं को निशाना बनाकर उन्हें प्रलोभन, दबाव एवं भय के माध्यम से धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जा रहा है। जो लोग धर्मांतरण से इंकार कर रहे हैं, उन्हें थाने एवं शासकीय कार्यालयों का भय दिखाकर झूठे प्रकरणों में फंसाने की धमकी दी जा रही है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि ग्राम के देवी-देवताओं एवं पारंपरिक संस्कृति के प्रति अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया जा रहा है, जिससे सामाजिक तनाव एवं वैमनस्य की स्थिति उत्पन्न हो रही है। साथ ही ग्राम सभा के वैधानिक निर्णयों का विरोध किया जा रहा है, जो पांचवी अनुसूची एवं पेसा अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत है।
ज्ञापन में विशेष रूप से उल्लेख किया गया कि ग्राम के आश्रित ग्राम में स्थित उपस्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ स्वास्थ्य सहायिका श्रीमती शुसील पति मोहन ग्वाल द्वारा स्वास्थ्य सेवा के नाम पर प्रार्थना एवं प्रलोभन के माध्यम से धर्मांतरण गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही उनके पति मोहन ग्वाल (पास्टर) द्वारा भी ग्राम में अवैध रूप से धर्मांतरण कराने का कार्य किया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त, ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि आंगनबाड़ी सहायिका मोनिका पति बोधन द्वारा छोटे बच्चों को ईसाई प्रार्थना करवाई जा रही है तथा उन्हें बिंदी लगाने और प्रसाद ग्रहण करने से रोका जा रहा है, जिससे बच्चों को ग्राम की पारंपरिक संस्कृति एवं धार्मिक मान्यताओं से दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। इस संबंध में ग्रामीणों ने उक्त सहायिका को तत्काल हटाने की मांग की है।
इसी संदर्भ में क्षेत्र में जनजागरण कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता ईश्वर कावड़े ने कहा कि “लगातार जागरूकता अभियान के बाद अब कथित रूप से अवैध धर्मांतरण में संलिप्त तत्व नए तरीकों से भोले-भाले ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं को निशाना बना रहे हैं। उन्हें थाने एवं सरकारी कार्यालयों का भय दिखाकर दबाव बनाया जा रहा है। ऐसे प्रयास न केवल कानून के विरुद्ध हैं, बल्कि समाज की सांस्कृतिक संरचना को भी प्रभावित करते हैं भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 धर्म की स्वतंत्रता प्रदान करता है, किंतु यह स्वतंत्रता सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता एवं स्वास्थ्य के अधीन है तथा किसी भी प्रकार के बल, प्रलोभन या दबाव के माध्यम से धर्मांतरण की अनुमति नहीं देता।”
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, एवं भारतीय न्याय संहिता की प्रासंगिक धाराओं के अंतर्गत कठोर कार्यवाही की जाए तथा ग्राम में शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने हेतु तत्काल कदम उठाए जाएं।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र प्रभावी कार्यवाही नहीं की गई, तो वे विधिक एवं लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

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