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10 साल, 10 सवाल: अमृत मिशन का वादा कहां गया? टैंकरों से जूझती जनता

जगदलपुर। शहर आज भी स्थायी पेयजल व्यवस्था का इंतजार कर रहा है। अमृत जल मिशन जैसी बड़ी योजना शुरू तो हुई, लेकिन शहर को अब तक इसका पूरा लाभ नहीं मिल सका। हर गर्मी आते ही जगदलपुर के कई वार्ड टैंकर आधारित व्यवस्था पर लौट आते हैं। 2016 में जिस योजना से 25 हजार घरों तक नल से जल पहुंचाने का वादा किया गया था, वह आज भी अधूरी है। योजना को 2019 तक पूरा होना था, लेकिन काम बीच रास्ते में ही अटका पड़ा है।

गर्मी के मौसम में हालात और गंभीर हो जाते हैं। 48 वार्डों में से हर साल करीब 12 वार्ड ड्राई जोन घोषित होते हैं। इन इलाकों में पानी की पूरी जिम्मेदारी टैंकरों पर होती है, लेकिन नगर निगम के पास मौजूद 35 टैंकरों में से 10 की हालत खराब बताई जा रही है। ऐसे में सीमित संसाधनों से पूरे ड्राई जोन को पानी पहुंचाना बड़ी चुनौती बना हुआ है। दूसरी ओर नगर निगम का दावा है कि अमृत जल मिशन को फिर से पटरी पर लाने की कोशिशें तेज है। करीब 110 करोड़ की इस योजना में एजेंसी बदलने और फंड की कमी से काम रुका है।

नगर निगम के मुताबिक, अमृत जल मिशन के लिए अब 6 करोड़ की राशि स्वीकृत हुई है और 15 करोड़ अतिरिक्त फंड की मांग शासन से की गई है। प्रशासन को उम्मीद है कि राशि मिलते ही काम पूरा होगा, लेकिन शहर आज भी पूछ रहा है कि जगदलपुर आखिर कब टैंकर मुक्त होगा।

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