
उन्होंने कहा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देश हैं कि न्यायिक हिरासत में किसी भी अंडरट्रायल कैदी की मृत्यु होने पर न्यायिक जांच अनिवार्य है। यह सरकार के विवेक पर निर्भर विषय नहीं है। इसके बावजूद, स्व. जीवन ठाकुर जी की मृत्यु के मामले में अब तक किसी भी प्रकार की न्यायिक जांच प्रारंभ नहीं की गई है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है।

मैं राज्य सरकार से स्पष्ट रूप से मांग करता हूँ कि इस प्रकरण की समयबद्ध जांच किसी बैठे हुए उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से कराई जाए, स्व. जीवन ठाकुर जी के परिवार को ₹1 करोड़ का मुआवज़ा प्रदान किया जाए, तथा नेता प्रतिपक्ष इस गंभीर मुद्दे को विधानसभा के चालू शीतकालीन सत्र में उठाकर सरकार से ठोस और स्पष्ट जवाब सुनिश्चित करें। न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि जनता को यह स्पष्ट रूप से दिखाई भी देना चाहिए।



