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बलौदाबाजार में साइबर ठगी का बड़ा खुलासा, म्यूल अकाउंट से ₹1.08 लाख का खेल; 2 आरोपी गिरफ्तार

बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में साइबर ठगी की रकम को बैंक खातों के जरिए खपाने वाले नेटवर्क का पुलिस ने खुलासा किया है। पलारी पुलिस ने ऑनलाइन फ्रॉड की रकम अपने बैंक खातों में ट्रांसफर करवाने और उसका लेनदेन करने के आरोप में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों के बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी, ऑनलाइन गेमिंग और अन्य अवैध गतिविधियों से जुड़ी रकम के लेनदेन के लिए किया जा रहा था।

इस कार्रवाई के बाद पुलिस अब मामले से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है। फरार आरोपी की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

जयपुर के युवक से हुई थी ₹1.08 लाख की ठगी

मामले की शुरुआत राजस्थान के जयपुर निवासी कैलाशचंद सेन की साइबर पोर्टल पर दर्ज शिकायत से हुई। शिकायत के मुताबिक, उन्हें झांसा देकर 1 लाख 8 हजार 644 रुपये की ऑनलाइन ठगी की गई थी।

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि ठगी की रकम बलौदाबाजार जिले के पलारी स्थित UCO बैंक की शाखा के एक खाते में ट्रांसफर हुई थी। इसके बाद पुलिस ने संबंधित बैंक खाते की जानकारी और स्टेटमेंट खंगाला।

बैंक रिकॉर्ड की जांच में इस रकम का संदिग्ध लेनदेन खिलेंद्र वर्मा के खाते से सामने आया।

ऐसे सामने आया म्यूल अकाउंट का पूरा खेल

पुलिस ने खिलेंद्र वर्मा को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में कथित तौर पर उसने बताया कि रायपुर निवासी दीपेश मल्होत्रा ने उसे बैंक खाता खुलवाने के लिए तैयार किया था।

आरोप है कि उसे बैंक खाता उपलब्ध कराने के बदले कमीशन देने का लालच दिया गया था। इसके बाद बैंक खाते से जुड़े एटीएम कार्ड और सिम कार्ड भी दीपेश मल्होत्रा के पास थे और वही खाते का संचालन कर रहा था।

यानी बैंक खाता किसी और के नाम पर था, लेकिन उसका इस्तेमाल दूसरे व्यक्ति द्वारा संदिग्ध पैसों के लेनदेन के लिए किया जा रहा था। साइबर अपराध की भाषा में ऐसे खातों को अक्सर म्यूल अकाउंट कहा जाता है।

ऑनलाइन गेमिंग और ठगी की रकम भी खपाने का आरोप

पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि इन बैंक खातों का इस्तेमाल सिर्फ एक साइबर फ्रॉड की रकम के लिए नहीं किया जा रहा था। आरोप है कि ऑनलाइन गेमिंग और अन्य अवैध गतिविधियों से जुड़ी रकम को भी इन खातों के जरिए ट्रांसफर और इधर-उधर किया जाता था।

ऐसे मामलों में साइबर ठग सीधे अपने खाते में रकम लेने के बजाय दूसरे लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं। इसके बदले खाता उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति को कमीशन दिया जाता है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं।

आरोपियों के कब्जे से दस्तावेज जब्त

जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से पैन कार्ड की कॉपी और अन्य दस्तावेज भी जब्त किए हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर बैंक खातों और उनसे जुड़े लेनदेन की जांच की जा रही है।

पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपियों ने कितने बैंक खाते खुलवाए थे और इन खातों में अब तक कितनी संदिग्ध रकम का लेनदेन हुआ है।

4 सितंबर को हुई गिरफ्तारी

पुलिस ने मामले में दोनों आरोपियों को 4 सितंबर को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेजने की प्रक्रिया की जा रही है।

वहीं, मामले में शामिल एक अन्य आरोपी फरार बताया जा रहा है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है और साइबर ठगी के इस नेटवर्क की आगे की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

साइबर ठगी से बचने के लिए रहें सावधान

पुलिस की इस कार्रवाई से एक बार फिर सामने आया है कि अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, सिम या बैंकिंग जानकारी किसी दूसरे व्यक्ति को उपलब्ध कराना भारी पड़ सकता है। कमीशन के लालच में बैंक खाता देने वाले लोग भी जांच के घेरे में आ सकते हैं।

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