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कल से नया शिक्षण सत्र, बिना अंकसूची के कैसे होगा प्रवेश? 

ढाई महीने से अधिक हो गए पांचवी, आठवीं के परिमाण घोषित हुए अब तक मार्कशीट नहीं दे पाए

 

रायपुर / शाला प्रवेश उत्सव और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि बिना मार्कशीट के पांचवीं पास बच्चे छठवीं में और आठवीं पास बच्चे नवमी में प्रवेश कैसे पाएंगे? इतिहास में पहली बार इतनी अक्षम सरकार आई है जो परिणाम घोषित होने के ढाई महीने बाद भी आज तक 5वी, 8वी के 7 लाख से अधिक बच्चों को अंकसूची नहीं दे पायी है। छात्र और अभिभावक एडमिशन को लेकर चिंतित हैं, पढ़ाई के लिए प्रदेश से बाहर जाने वाले छात्र सबसे ज्यादा परेशानी झेल रहे हैं। इस सरकार की अकर्मण्यता से नए स्कूलों में प्रवेश के लिए आवश्यक दस्तावेज नहीं जुटा पा रहे हैं, बिना मूल अंकसूची के स्थानांतरण प्रमाणपत्र (टी सी) भी नहीं दिया जा रहा है, यह सरकार असल समस्याओं से ध्यान भटकाने के लिए प्रवेश उत्सव का राजनैतिक इवेंट कर रही है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि प्रदेश में केंद्रित परीक्षा प्रणाली लागू है, पांचवी और आठवीं की परीक्षा शिक्षा विभाग ने शासकीय स्कूलों के साथ ही सभी मान्यता प्राप्त अशासकीय स्कूलों में भी ली है, अप्रैल 2023 में ही परिणाम घोषित हो चुका है लेकिन मूल अंकसूची अब तक पूरे प्रदेश में कहीं किसी स्कूलों में नहीं पहुंची है, नया शिक्षण सत्र शुरू हो चुका है, शिक्षा विभाग मौन हैं, छात्र और अभिभावक एडमिशन को लेकर चिंतित हैं।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि सरकार की उदासीनता के कारण ही छत्तीसगढ़ में शिक्षा का स्तर लगातार गिर रहा है, एकीकृत जिला सूचना प्रणाली के द्वारा जारी रिपोर्ट में वर्ष 2024-25 की रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ देश में नीचे से तीसरे क्रम पर है, जो इस सरकार के लिए शर्मनाक है, भाषा का स्तर माइनस -3 और माइनस विज्ञान का -5 है, स्कूलों में नियमित शिक्षकों की भर्तियां रोक दी गई है, अधिकांश स्कूलों में शौचालय नहीं हैं, शिक्षकों से कभी कुत्ते गिनवा रहे, कभी मवेशी, एसआईआर ड्यूटी के बाद अब जनगणना, पेपरलिक के मामले में यह सरकार बदनाम हो चुकी है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में पहले लगभग 80 हजार सीटों में आरटीई के तहत निजी स्कूलों में गरीब बच्चों के प्रवेश होते थे, अब घटकर मात्र 21 हजार 975 रह गया है, उसने भी 25 प्रतिशत रिक्त नहीं मिल पा रहा है, पात्र हितग्रहियों को लाभ देने में इस सरकार का फोकस नहीं है होते थे जिसे इस साल काटकर मात्र 21,975 कर दिया गया है अर्थात आरटीई की सीटों में 80 प्रतिशत की कटौती की गई है। पहले 10,463 स्कूल बंद किया, फिर नए सेटअप के नाम पर सभी 53 हजार स्कूलों में शिक्षकों के न्यूनतम पदों की संख्या हर स्कूल में एक एक घटाएं, अब शिक्षा के अधिकार पर इस सरकार की बुरी नजर है, भाजपाई नहीं चाहते कि गरीब बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो। प्रवेश उत्सव मनाने से पहले पांचवी, आठवीं के बच्चों को अंकसूची उपलब्ध कराए सरकार।

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