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राहुल गांधी पहले शिवतत्त्व को समझें, सनातन संस्कृति और छत्तीसगढ़ की अस्मिता का अपमान करने के लिए कांग्रेस देश एवं प्रदेशवासियों से मांगे माफी : पुरन्दर मिश्रा

राहुल गांधी के बयान पर पुरन्दर मिश्रा का तीखा प्रहार, कांग्रेस प्रदेशवासियों से मांगे माफ

राहुल गांधी शिवतत्त्व समझें, सनातन संस्कृति और छत्तीसगढ़ के अपमान पर कांग्रेस मांगे सार्वजनिक माफी : पुरन्दर मिश्रा

रायपुर – राहुल गांधी जी द्वारा रामलीला मैदान में भगवान शिव की बारात और तांडव का उल्लेख करना कई सवाल खड़े करता है। भगवान भोलेनाथ की बारात समरसता, सद्भाव और सामाजिक एकात्मता का प्रतीक है, जिसमें समाज के प्रत्येक वर्ग का स्थान है। हम शिवजी की बारात में सहर्ष शामिल होंगे, लेकिन तांडव को राजनीतिक अराजकता से जोड़ने की मानसिकता का समर्थन नहीं कर सकते। भगवान शिव का तांडव सनातन धर्म का गहन आध्यात्मिक दर्शन है, कोई राजनीतिक नारा नहीं। राहुल गांधी जी को पहले शिवतत्त्व समझना चाहिए और सनातन संस्कृति को बार-बार आहत करने के लिए देश से माफी मांगनी चाहिए।

कांग्रेस का देशहित की बात करना भी समझ से परे है। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस, 1 नवंबर जैसे गौरवशाली अवसर का बहिष्कार कर कांग्रेस नेताओं ने छत्तीसगढ़ महतारी और प्रदेश के तीन करोड़ नागरिकों की भावनाओं का अपमान किया है। कांग्रेस को प्रदेशवासियों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।

वहीं 1 नवंबर 1984 को हुए सिख नरसंहार की दर्दनाक घटना भी देश के इतिहास का एक काला अध्याय है। कांग्रेस को उस घटना की जिम्मेदारी और अपने नेताओं की भूमिका पर जवाब देना चाहिए। एक ओर कांग्रेस इतिहास की घटनाओं पर राजनीति करती है, वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ के स्थापना दिवस का बहिष्कार करती है। यह दोहरा रवैया उसकी मानसिकता को उजागर करता है।

रामलीला मैदान में 10 लाख लोगों की भीड़ के दावों पर भी सवाल हैं, जबकि मैदान की कुल क्षमता लगभग 45 हजार बताई जाती है और उसका एक बड़ा हिस्सा मंच एवं अन्य व्यवस्थाओं में उपयोग होता है। कांग्रेस को अपने दावों की वास्तविकता स्पष्ट करनी चाहिए।

कांग्रेस का राजनीतिक इतिहास सत्ता में रहते हुए आपातकाल लगाने और सत्ता से बाहर रहने पर राजनीतिक अस्थिरता एवं भ्रम का माहौल बनाने के आरोपों से घिरा रहा है। आज भी राहुल गांधी और कांग्रेस देश के ज्वलंत मुद्दों पर सकारात्मक भूमिका निभाने के बजाय राजनीतिक टकराव को बढ़ावा दे रहे हैं।

देश को अराजकता नहीं, एकता चाहिए; राजनीतिक स्वार्थ नहीं, राष्ट्रहित चाहिए। सनातन संस्कृति, सिख समाज के सम्मान और छत्तीसगढ़ की अस्मिता के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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