
स्व-सहायता समूहों के लिए सुनहरा मौका: खैरागढ़ में 1 से 3 नवंबर तक सजेगा सरस मेला, कलेक्टर ने दिए निर्देश
राजा फतेह सिंह खेल मैदान में होगा तीन दिवसीय भव्य आयोजन, पारंपरिक व्यंजन और स्थानीय उत्पाद रहेंगे आकर्षण का केंद्र
महिला स्व-सहायता समूहों के आजीविका संवर्धन और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की पहल
खैरागढ़, छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के अंतर्गत जिला पंचायत खैरागढ़-छुईखदान-गंडई द्वारा जिला स्तरीय तीन दिवसीय सरस मेले का आयोजन 1 से 3 नवंबर 2026 तक राजा फतेह सिंह खेल मैदान, खैरागढ़ में किया जाएगा। मेले में स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित विभिन्न उत्पादों की प्रदर्शनी एवं बिक्री के साथ छत्तीसगढ़ी पारंपरिक व्यंजनों का विशेष आकर्षण रहेगा। आयोजन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराना, उनके आर्थिक सशक्तीकरण को बढ़ावा देना तथा स्वरोजगार एवं आजीविका के अवसरों का विस्तार करना है।
*स्व-सहायता समूहों के उत्पादों की लगेगी प्रदर्शनी*
सरस मेले में महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार कपड़े, बैग-पर्स, पापड़-बड़ी, अचार, मसाले, पान के व्यंजन, शुद्ध बेसन, दाल, मिट्टी के दीये, बांस कला से निर्मित सामग्री, डेयरी उत्पाद, जैविक सब्जियां, फल तथा जैविक चावल सहित विभिन्न उत्पादों की प्रदर्शनी एवं बिक्री की जाएगी। इससे ग्रामीण महिलाओं को अपने उत्पाद सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने और स्थानीय स्तर पर व्यापारिक अवसर प्राप्त करने का मंच मिलेगा।
*छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के साथ फास्ट फूड का भी मिलेगा स्वाद*
मेले में पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के विशेष स्टॉल लगाए जाएंगे। यहां आगंतुक छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के साथ चाट, गुपचुप, भेल, चाय-कॉफी, फास्ट फूड एवं साउथ इंडियन व्यंजनों का आनंद ले सकेंगे। स्थानीय खानपान और पारंपरिक स्वाद के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध खाद्य संस्कृति को प्रोत्साहन मिलेगा।
*प्रतिदिन सुबह 11 से रात 10 बजे तक चलेगा मेला*
तीन दिवसीय सरस मेला 1 नवंबर से 3 नवंबर तक प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात्रि 10 बजे तक आयोजित होगा। आयोजन में आम नागरिकों को एक ही स्थान पर ग्रामीण उत्पादों की खरीदारी और विभिन्न पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लेने का अवसर मिलेगा।
जिला पंचायत खैरागढ़-छुईखदान-गंडई एवं छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ द्वारा जिले के नागरिकों से मेले में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों की खरीदारी करने तथा ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण में सहभागी बनने की अपील की गई है।



