
बालोद। बच्चों को सुरक्षित रखने और उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से गुरूर विकासखंड के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय फागुनदहा में विशेष जन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला बाल संरक्षण इकाई और मिशन शक्ति की ओर से आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों को गुड टच-बैड टच, साइबर क्राइम, बाल अधिकार और बाल संरक्षण कानूनों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का आयोजन कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देश और जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री अमित सिन्हा के मार्गदर्शन में किया गया। जिला बाल संरक्षण अधिकारी श्री गजानंद साहू के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को किसी भी तरह के शोषण, अपराध या संकट से बचाव के लिए जागरूक करना था।

बच्चों को बताया गया गुड टच और बैड टच का अंतर
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को आसान भाषा में समझाया गया कि उन्हें किस तरह के स्पर्श से सावधान रहना चाहिए। बच्चों को बताया गया कि अगर कोई व्यक्ति उन्हें असहज महसूस कराए या गलत तरीके से छूने की कोशिश करे, तो वे चुप न रहें और तुरंत किसी भरोसेमंद बड़े व्यक्ति को इसकी जानकारी दें।
बच्चों को यह भी समझाया गया कि किसी गलत व्यवहार के लिए उन्हें खुद को दोषी नहीं मानना चाहिए और जरूरत पड़ने पर सहायता मांगने में बिल्कुल संकोच नहीं करना चाहिए।
साइबर क्राइम से बचने के भी बताए तरीके
आज के डिजिटल दौर में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा भी बेहद महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को साइबर क्राइम और इंटरनेट पर होने वाले संभावित खतरों के बारे में जानकारी दी गई।
उन्हें सोशल मीडिया और इंटरनेट का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतने, अनजान लोगों से बातचीत में सतर्क रहने तथा निजी जानकारी साझा न करने के बारे में समझाया गया।
बाल अधिकार और कानूनों की जानकारी
जागरूकता कार्यक्रम में विद्यार्थियों को बच्चों की सुरक्षा से जुड़े प्रमुख कानूनों के बारे में भी बताया गया। इनमें प्रमुख रूप से—
- पॉक्सो अधिनियम, 2012
- किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015
- बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006
- चाइल्ड हेल्पलाइन 1098
की जानकारी दी गई।
विद्यार्थियों को बताया गया कि यदि उनके साथ या उनके आसपास किसी बच्चे के साथ शोषण, हिंसा, बाल विवाह या किसी अन्य तरह की परेशानी होती है, तो इसकी सूचना संबंधित विभाग या हेल्पलाइन के माध्यम से दी जा सकती है।
संकट में 1098 पर मिल सकती है मदद
कार्यक्रम में चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की भूमिका पर भी विशेष जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि किसी बच्चे के सामने संकट की स्थिति होने पर सहायता लेने के लिए संबंधित हेल्पलाइन का उपयोग किया जा सकता है।
अधिकारियों ने बच्चों से अपील की कि किसी भी प्रकार की परेशानी को छिपाने के बजाय समय रहते इसकी जानकारी अभिभावक, शिक्षक या संबंधित अधिकारियों को दें।
बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं रहे मौजूद
कार्यक्रम में विद्यालय के प्राचार्य श्री एल.एस. रावटे, शिक्षक-शिक्षिकाएं, मिशन शक्ति से श्रीमती दिनेश्वरी सिन्हा, जिला बाल संरक्षण इकाई के सामाजिक कार्यकर्ता श्री अनिल सिन्हा और आउटरीच वर्कर श्री नूतन उपस्थित रहे।
इसके अलावा विद्यालय के बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने कार्यक्रम में भाग लिया और बाल सुरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।
जागरूकता ही बच्चों की सुरक्षा की पहली सीढ़ी
इस तरह के जागरूकता कार्यक्रमों का उद्देश्य बच्चों को केवल कानूनों की जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें अपनी सुरक्षा के प्रति सजग और आत्मविश्वासी बनाना भी है।
बच्चों को उनके अधिकारों, सुरक्षित व्यवहार और मदद लेने के तरीकों की जानकारी मिलने से वे किसी भी संभावित खतरे को पहचानने और समय रहते सहायता लेने में अधिक सक्षम हो सकते हैं।
जिला बाल संरक्षण इकाई और मिशन शक्ति की यह पहल स्कूल स्तर पर बाल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा सकती है।



