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कांकेर जिला अस्पताल में कलेक्टर का अचानक दौरा, रात में भी मरीजों को मिले इलाज; मशीन खराब मिली तो 2 दिन में सुधार के निर्देश

कांकेर। जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं और व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए कलेक्टर कुंदन कुमार ने मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला चिकित्सालय कांकेर का आकस्मिक निरीक्षण किया। अचानक अस्पताल पहुंचे कलेक्टर ने अलग-अलग वार्डों और चिकित्सा सुविधाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने भर्ती मरीजों से बातचीत कर इलाज और अस्पताल में मिल रही सुविधाओं के बारे में भी जानकारी ली।

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि मरीजों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना अस्पताल की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। खासतौर पर रात के समय अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को इलाज के लिए किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए।

ट्रॉमा सेंटर से लेकर ओपीडी तक व्यवस्थाओं का जायजा

कलेक्टर कुंदन कुमार ने अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर, आपातकालीन कक्ष, इंचार्ज रूम, ड्यूटी डॉक्टर कक्ष, ड्रेसिंग कक्ष और प्लास्टर रूम का निरीक्षण किया। इसके अलावा ओपीडी पंजीयन, सर्जरी ओपीडी, आर्थो ओपीडी, सीटी स्कैन और फिजियोथेरेपी कक्ष की व्यवस्थाएं भी देखीं।

उन्होंने अस्पताल में भर्ती मरीजों से सीधे बातचीत कर उनके उपचार की स्थिति जानी। मरीजों से यह भी पूछा गया कि उन्हें अस्पताल में इलाज और अन्य स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में किसी तरह की परेशानी तो नहीं हो रही है।

रात में आने वाले मरीजों के लिए खास निर्देश

कलेक्टर ने चिकित्सा स्टाफ की ड्यूटी नियमित और व्यवस्थित तरीके से लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि मध्य रात्रि में अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को तत्काल और उचित उपचार मिलना चाहिए।

इसके लिए शिफ्टवार मेडिकल स्टाफ की ड्यूटी सुनिश्चित करने को कहा गया, ताकि इमरजेंसी में पहुंचने वाले मरीजों को डॉक्टर या चिकित्सा स्टाफ के उपलब्ध नहीं होने के कारण परेशानी का सामना न करना पड़े।

शाम को भी चलेगी फिजियोथेरेपी सेवा

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने फिजियोथेरेपी सेवाओं को शाम के समय भी संचालित करने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि मरीजों को उनकी सुविधा के अनुसार उपचार मिलना चाहिए।

अस्पताल में लगी ईको मशीन को लेकर भी कलेक्टर ने निर्देश दिए। उन्होंने मशीन को दो दिन के भीतर सुधारने को कहा। यदि मशीन की मरम्मत संभव नहीं है तो उसे रिप्लेस करने की कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

कलेक्टर ने कहा कि अस्पताल में कोई भी चिकित्सा मशीन खराब होने पर उसे लंबे समय तक बंद न रखा जाए। ऐसी स्थिति में तत्काल मरम्मत कराकर मरीजों को सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

डॉक्टरों और स्टाफ की वेशभूषा पर भी जोर

कलेक्टर ने डॉक्टरों और चिकित्सा स्टाफ को निर्धारित वेशभूषा में रहने तथा अनिवार्य रूप से नेमप्लेट लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने अस्पताल परिसर की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने और शौचालयों को स्वच्छ रखने को कहा।

उन्होंने सभी कर्मचारियों को अनुशासन के साथ काम करने और मरीजों व उनके परिजनों के साथ अच्छा व्यवहार करने की हिदायत दी।

कलेक्टर ने कहा कि मरीजों के साथ चिकित्सा स्टाफ का व्यवहार ही जिला अस्पताल की छवि बनाता है। अस्पताल आने वाला मरीज उपचार के साथ सम्मान और बेहतर व्यवहार की भी अपेक्षा करता है। इसलिए कोशिश होनी चाहिए कि मरीज अस्पताल से संतुष्ट होकर वापस लौटे।

रेफर मरीजों की होगी नियमित मॉनिटरिंग

कलेक्टर ने अस्पताल से दूसरे स्थानों पर रेफर किए जाने वाले मरीजों की नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने रेफरल मरीजों का संपूर्ण विवरण उपलब्ध कराने को कहा, ताकि यह जानकारी रहे कि मरीज को किस कारण से और कहां रेफर किया गया।

इसके साथ ही उन्होंने अस्पताल में शिकायत पेटी रखने के निर्देश दिए, जिससे मरीज और उनके परिजन अपनी समस्या या शिकायत सीधे दर्ज करा सकें।

पंजीयन प्रक्रिया को डिजिटल बनाने के निर्देश

अस्पताल की व्यवस्थाओं को आधुनिक बनाने के लिए कलेक्टर ने प्रत्येक पंजीयन रजिस्टर के पास कंप्यूटर की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। मरीजों का पंजीयन डिजिटल प्रणाली से करने पर जोर देते हुए उन्होंने अस्पताल अधीक्षक को आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।

अस्पताल परिसर में पार्किंग व्यवस्था को भी दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए, ताकि मरीजों और उनके परिजनों को आने-जाने में परेशानी न हो।

कलेक्टर के प्रमुख निर्देश

  • रात में आने वाले मरीजों को तत्काल उपचार मिले।
  • शिफ्टवार मेडिकल स्टाफ की ड्यूटी सुनिश्चित की जाए।
  • फिजियोथेरेपी सेवा शाम के समय भी संचालित हो।
  • ईको मशीन को दो दिन में ठीक किया जाए।
  • खराब चिकित्सा उपकरणों की तत्काल मरम्मत कराई जाए।
  • डॉक्टर और स्टाफ निर्धारित ड्रेस व नेमप्लेट में रहें।
  • अस्पताल और शौचालयों की साफ-सफाई बेहतर रखी जाए।
  • मरीजों और परिजनों से अच्छा व्यवहार किया जाए।
  • रेफर मरीजों की नियमित मॉनिटरिंग हो।
  • शिकायत पेटी और डिजिटल पंजीयन की व्यवस्था की जाए।
  • पार्किंग व्यवस्था को व्यवस्थित रखा जाए।

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