
रायपुर। राजधानी रायपुर के ग्रामीण क्षेत्र से सरकारी राशन व्यवस्था में बड़ी गड़बड़ी का मामला सामने आया है। मंदिर हसौद थाना क्षेत्र के सेरीखेड़ी स्थित शासकीय उचित मूल्य दुकान में जांच के दौरान 1225 क्विंटल सरकारी चावल की कमी पाई गई। खाद्य विभाग ने गायब चावल की कीमत 50 लाख 9 हजार 956 रुपये आंकी है। मामले में पुलिस ने महिला स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष, विक्रेता और सहायक विक्रेता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
यह दुकान श्री राधा मोहन महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा वर्ष 2024 से संचालित की जा रही थी। खाद्य निरीक्षक देवेश देवदास ने कलेक्टर खाद्य शाखा के निर्देश पर मंदिर हसौद थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। एफआईआर में समूह की अध्यक्ष माया यादव, विक्रेता अंजू यादव और सहायक विक्रेता हरिशंकर साहू को आरोपित बनाया गया है।

औचक जांच में खुली राशन दुकान की पोल
एफआईआर के अनुसार, 30 अक्टूबर 2025 को उचित मूल्य दुकान का औचक निरीक्षण किया गया था। जांच के दौरान कई हितग्राहियों ने दुकान के संचालन को लेकर शिकायतें कीं।
हितग्राहियों ने आरोप लगाया कि दुकान समय पर नहीं खुलती थी। कई मामलों में पहले ई-पॉस मशीन में अंगूठा लगवाकर खाद्यान्न वितरण दर्ज कर दिया जाता था, जबकि वास्तविक चावल कथित तौर पर तीन-चार दिन बाद दिया जाता था।
इसके बाद खाद्य विभाग की टीम ने ऑनलाइन रिकॉर्ड और दुकान में मौजूद वास्तविक स्टॉक का मिलान किया।
जांच में सामने आया कि—
- ऑनलाइन रिकॉर्ड में 1012.42 क्विंटल चावल उपलब्ध दिखाया गया था।
- मौके पर केवल 35 क्विंटल चावल मिला।
- पहली जांच में ही 977.42 क्विंटल चावल की कमी सामने आई।
दूसरी जांच में बढ़कर 1225 क्विंटल हुई कमी
पहली जांच में गड़बड़ी सामने आने के बाद दुकान को अस्थायी रूप से दूसरी संस्था को सौंप दिया गया। इसके बाद 23 नवंबर 2025 को दोबारा भौतिक सत्यापन कराया गया।
दूसरी जांच में ऑनलाइन स्टॉक, विभिन्न योजनाओं के रिकॉर्ड और उपलब्ध खाद्यान्न का मिलान किया गया। इस दौरान कुल 1225 क्विंटल चावल की कमी सामने आई।
खाद्य विभाग ने इस चावल का आर्थिक मूल्य 50,09,956 रुपये निर्धारित किया है। विभाग के अनुसार, यह शासन को हुई प्रत्यक्ष आर्थिक क्षति है।
कारण बताओ नोटिस का भी नहीं दिया जवाब
जांच के बाद खाद्य विभाग ने संचालक संस्था को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। विभाग का कहना है कि नोटिस का जवाब नहीं दिया गया। इसके अलावा कमी पाए गए सरकारी चावल की भरपाई भी नहीं की गई।
इसके बाद कलेक्टर खाद्य शाखा के आदेश पर पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई की गई।
PDS नियमों के उल्लंघन का आरोप
एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि संबंधित लोगों ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश-2016 के विभिन्न प्रावधानों का उल्लंघन किया। सरकारी खाद्यान्न के कथित गबन और आवश्यक वस्तु अधिनियम के उल्लंघन को लेकर मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस अब इन बिंदुओं की करेगी जांच
- दुकान को आवंटित सरकारी चावल की कुल मात्रा
- ऑनलाइन रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक का अंतर
- ई-पॉस मशीन में दर्ज खाद्यान्न वितरण
- हितग्राहियों को वास्तव में दिए गए राशन का रिकॉर्ड
- खाद्यान्न की कमी से जुड़े दस्तावेज
- संबंधित वित्तीय लेन-देन और अन्य लोगों की संभावित भूमिका
इन धाराओं में दर्ज हुई FIR
मंदिर हसौद थाना पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3/7 तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) और 3(5) के तहत अपराध दर्ज किया है।
पुलिस और खाद्य विभाग अब राशन वितरण, स्टॉक रजिस्टर, ऑनलाइन रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि 1225 क्विंटल सरकारी चावल की कमी कैसे हुई और इसमें किसकी क्या भूमिका थी।
फिलहाल मामला जांच के अधीन है और एफआईआर में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।



