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कोयले की ख़ान से भी बेदाग निकले पूर्व प्रधानमंत्री -कांग्रेस

मनमोहन सिंह पर कीचड़ उछालने वाले अब देश से माफी मांगें

 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने भाजपा के वर्षों पुराने झूठ और दुष्प्रचार की पोल खोल दी

रायपुर / सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह जी के खिलाफ कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में आपराधिक कार्यवाही समाप्त करने और सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार किए जाने के बाद यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है कि भाजपा ने वर्षों तक राजनीतिक लाभ के लिए एक ईमानदार, विद्वान और देशभक्त प्रधानमंत्री की छवि को बदनाम करने का सुनियोजित अभियान चलाया था।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह वह नेता थे जिनकी ईमानदारी पर उनके राजनीतिक विरोधी भी उंगली उठाने से बचते थे। लेकिन सत्ता की भूखी राजनीति ने उन्हें निशाना बनाया, उनकी छवि पर सवाल उठाए और देश के सामने ऐसा माहौल बनाया मानो दोष सिद्ध हो चुका हो। आज सर्वाेच्च न्यायालय के फैसले ने उस पूरे नैरेटिव को ध्वस्त कर दिया है।

सबसे बड़ा सवाल भाजपा और उसके नेताओं से है कि क्या वे अब देश की जनता से माफी मांगेंगे? क्या वे स्वीकार करेंगे कि उन्होंने वर्षों तक झूठे आरोपों, आधे-अधूरे तथ्यों और राजनीतिक प्रचार के माध्यम से एक सम्मानित प्रधानमंत्री की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई?

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि जिस व्यक्ति ने भारत को आर्थिक महाशक्ति बनने की दिशा दी, करोड़ों लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा और वैश्विक मंच पर भारत का सम्मान बढ़ाया, उसी व्यक्ति को राजनीतिक लाभ के लिए कटघरे में खड़ा किया गया। आज न्यायपालिका ने स्पष्ट कर दिया है कि सच्चाई और राजनीतिक आरोपों में कितना बड़ा अंतर होता है।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि भाजपा को यह भी बताना चाहिए कि यदि डॉ. मनमोहन सिंह दोषी नहीं थे, तो वर्षों तक उन्हें “घोटाले” का चेहरा बनाकर देश को गुमराह क्यों किया गया? क्या यह जनता के विश्वास के साथ छल नहीं था?

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला केवल डॉ. मनमोहन सिंह जी की प्रतिष्ठा की पुनर्स्थापना नहीं है, बल्कि यह उन सभी लोगों के लिए जवाब है जिन्होंने झूठ को बार-बार दोहरा कर उसे सच साबित करने की कोशिश की। इतिहास गवाह है कि सत्ता के शोर से कुछ समय के लिए सच्चाई दब सकती है, लेकिन पराजित नहीं हो सकती। आज न्याय की जीत हुई है, सत्य की जीत हुई है और राजनीतिक झूठ की हार हुई है।

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