
चारामा / तहसील चारामा के तत्कालीन पटवारी बालाराम जैन के विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता रेवती रमण तिवारी द्वारा थाना चारामा में दिए गए शिकायत आवेदन पर 90 दिन बीत जाने के बाद भी जांच एवं कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि पुलिस की कार्यप्रणाली गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन पटवारी बालाराम जैन ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए आवेदक की बहन के नाम दर्ज आबादी भूमि का कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार कर कूटरचना की और तहसीलदार के आदेश के बिना राजस्व नियमों को ताक पर रखकर उस भूमि का नामांतरण दूसरे व्यक्ति के नाम पर कर दिया। इस संबंध में आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की गई थी।
शिकायतकर्ता के अनुसार, पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज करने के बजाय धोखाधड़ी एवं जालसाजी जैसे गंभीर अपराध पर कोई कार्रवाई नहीं करते हुए नालिशी जारी कर उन्हें न्यायालय की शरण में जाने की सलाह दी। हालांकि, जारी नालिशी में कथित आरोपी बालाराम जैन का नाम हटा कर के सुभाष सोनकर का नाम गैर-शिकायतकर्ता के रूप में दर्ज होने का दावा किया गया है। जबकि शिकायतकर्ता ने धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में दोनों के विरुद्ध शिकायत किया है ।
आरोप है कि जिस व्यक्ति के विरुद्ध शिकायत की गई थी, उसके स्थान पर दूसरे व्यक्ति का नाम दर्ज कर दिए जाने से फरियादी को गुमराह किया गया। शिकायतकर्ता ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने तथा कथित आरोपियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल इस मामले में पुलिस अथवा संबंधित पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन इस मामले की शिकायत पुलिस अधीक्षक कांकेर से किये जाने की चर्चा हो रही है ।



