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बाईपास के नाम पर 13 माह से जमीनों की खरीदी-बिक्री पर रोक, किसान और ग्रामीण परेशान

कंडेल, चारामा और जैसाकर्रा में 7 मई 2025 से लागू प्रतिबंध अब तक बरकरार, सर्वे के अलावा भू-अर्जन प्रक्रिया में प्रगति नहीं होने का आरोप; रोक हटाने या अधिग्रहण तेज करने की मांग

कांकेर/चारामा / राष्ट्रीय राजमार्ग के प्रस्तावित बाईपास निर्माण के लिए भू-अर्जन प्रक्रिया के तहत कंडेल, चारामा और जैसाकर्रा क्षेत्र में 7 मई 2025 से भूमि की खरीदी-बिक्री तथा भूमि विभाजन पर लगाए गए प्रतिबंध को 13 माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी नहीं हटाया गया है। लंबे समय से जारी इस प्रतिबंध के कारण किसान, भू-स्वामी और आम ग्रामीणों को विभिन्न प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता के पत्र के आधार पर कांकेर कलेक्टर द्वारा आदेश जारी कर संबंधित क्षेत्रों में भूमि के क्रय-विक्रय एवं विभाजन पर रोक लगाई गई थी, ताकि प्रस्तावित बाईपास के लिए भू-अर्जन की प्रक्रिया प्रभावित न हो। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने लंबे समय में केवल प्रारंभिक सर्वे कर प्रभावित भूमि के खसरा नंबरों का चिन्हांकन किया गया है, जबकि भू-अर्जन की आगे की प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सकी है।
क्षेत्र के किसानों का कहना है कि जमीनों की खरीदी-बिक्री पर रोक के कारण वे अपनी निजी एवं पारिवारिक जरूरतों के अनुरूप भूमि का लेन-देन नहीं कर पा रहे हैं। कई मामलों में ऋण, पारिवारिक बंटवारा, निवेश और अन्य आवश्यक कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।
इधर, मानसून शुरू होने के साथ किसान खरीफ फसलों की तैयारी में जुट गए हैं। जिन किसानों की भूमि प्रस्तावित बाईपास की जद में आने की संभावना है, उनके सामने यह असमंजस बना हुआ है कि भविष्य में उनकी जमीन का अधिग्रहण कब होगा और उन्हें मुआवजा कब मिलेगा। इससे खेती और भविष्य की योजना दोनों प्रभावित हो रही हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि प्रशासन और संबंधित विभाग निकट भविष्य में भू-अर्जन की प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकते हैं, तो लंबे समय से लागू प्रतिबंध को हटाने पर विचार किया जाना चाहिए, ताकि आम लोगों को अनावश्यक परेशानी से राहत मिल सके।
क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना से जुड़े अधिकारियों से मांग है कि या तो भू-अर्जन की प्रक्रिया में तेजी लाकर प्रभावित किसानों को समय पर मुआवजा और स्पष्ट जानकारी दी जाए, अथवा भूमि खरीदी-बिक्री एवं विभाजन पर लगाए गए प्रतिबंध को तत्काल समाप्त किया जाए।
फिलहाल इस संबंध में जिला प्रशासन अथवा संबंधित विभाग की ओर से प्रतिबंध हटाने या भू-अर्जन प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। क्षेत्र की जनता अब प्रशासन के निर्णय का इंतजार कर रही है।

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