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नैनो उर्वरकों का कमाल! किसान की धान उपज में 10% बढ़ोतरी, आधी हुई यूरिया की खपत

उत्तर बस्तर कांकेर, किसानों के लिए सामान्य खाद के स्थान पर नैनो खाद वरदान बन गई है। इसके उपयोग से प्रति एकड़ रकबे में कम लागत में बेहतर फसल का उत्पादन हो रहा है। जिले के कांकेर ब्लॉक के ग्राम कोटगांवनीचे के प्रगतिशील कृषक श्री अघन सिंह दर्रो ने आधुनिक कृषि अपनाकर क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया है।कृषि विभाग की सलाह पर इस वर्ष उन्होंने अपने धान की फसल में पारंपरिक उर्वरकों के साथ नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी का संतुलित उपयोग किया, जिसके अत्यंत सकारात्मक और अनुकूल परिणाम प्राप्त हुए।

रोपा उपचार एवं उर्वरक प्रबंधन
धान की रोपाई से पूर्व श्री अघन सिंह दर्रो ने पौधों की जड़ों (रोपा) का नैनो डीएपी घोल से उपचार किया। इस तकनीक से पौधों की जड़ों का विकास मजबूत एवं गहरा हुआ, जिससे फसल को प्रारंभ से ही बेहतर पोषण एवं मजबूती मिली। फसल में कुल 100 किलोग्राम नाइट्रोजन आवश्यकता की पूर्ति हेतु उन्होंने दानेदार यूरिया की मात्रा में 50 प्रतिशत की कमी की। शेष नाइट्रोजन की पूर्ति के लिए फसल की अवस्था 40 से 45 दिनों पर नैनो यूरिया का पर्णीय छिड़काव किया गया, जिससे फसल की वानस्पतिक वृद्धि में उल्लेखनीय सुधार हुआ। साथ ही अधिक संख्या में कल्ले निकले तथा पौधों का तना मजबूत बना और फसल अंत तक स्वस्थ एवं हरी-भरी बनी रही। इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होने से खेती की लागत में कमी आई तथा पिछले खरीफ वर्ष की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत अधिक उत्पादन प्राप्त हुआ।
कृषक ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि वह पहले केवल सामान्य उर्वरकों पर निर्भर थे, जिससे लागत अधिक आती थी। इस बार कृषि विभाग की सलाह पर रोपाई से पहले रोपा का नैनो डीएपी से उपचार किया तथा बाद में नैनो यूरिया का भी छिड़काव किया। इसका परिणाम बहुत शानदार रहा। दानेदार यूरिया की आधी बचत हुई, वहीं पौधों की बढ़ोत्तरी अच्छी हुई और फसल पूरी तरह स्वस्थ रही। इस तरह कम लागत में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत अधिक पैदावार प्राप्त हुई।

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