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कांकेर का गांधी उद्यान बना बदहाली का अड्डा! सेनानी स्तंभ के आसपास ठेले, गाड़ियां और गंदगी से उठे सवाल

कांकेर। शहर के बीचों-बीच स्थित गांधी उद्यान कभी कांकेर की पहचान और लोगों के लिए सुकून का प्रमुख स्थान हुआ करता था। आज यही ऐतिहासिक स्थल बदहाली और अव्यवस्था से जूझ रहा है। स्वतंत्रता सेनानियों की याद में स्थापित सेनानी स्तंभ के आसपास जिस तरह ठेले, अवैध पार्किंग और गंदगी दिखाई दे रही है, उससे स्मारक की गरिमा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्मारक के आसपास चाट-गुपचुप के ठेले लगाए जा रहे हैं। कई लोग फुटपाथ पर सामान रखकर दुकान संचालित कर रहे हैं। इसके अलावा छोटी-बड़ी गाड़ियों की पार्किंग भी स्मारक के आसपास होने लगी है। आवारा कुत्ते और मवेशी भी परिसर में बैठे दिखाई देते हैं।

ऐसे में स्थानीय लोगों का सवाल है कि जिस स्थान पर स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान को याद किया जाना चाहिए, वहां इस तरह की अव्यवस्था क्यों बनी हुई है?

सड़क चौड़ीकरण के बाद बिगड़ी तस्वीर

स्थानीय लोगों के मुताबिक सड़क चौड़ीकरण के दौरान गांधी उद्यान की बाउंड्री तोड़ी गई थी। उस समय लोगों ने इसका विरोध किया था और उम्मीद जताई गई थी कि सड़क निर्माण के बाद उद्यान को नए सिरे से व्यवस्थित और सुंदर बनाया जाएगा।

लेकिन काफी समय बीतने के बावजूद उद्यान की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है।

बाउंड्री टूटने के बाद परिसर खुला हो गया और आसपास अस्थायी दुकानें तथा वाहनों की आवाजाही बढ़ती गई। इससे स्मारक की सुरक्षा और स्वच्छता को लेकर भी चिंता बढ़ी है।

स्वतंत्रता सेनानी स्मारक के आसपास अव्यवस्था

गांधी उद्यान में स्थापित सेनानी स्तंभ स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े बलिदानों की याद दिलाता है। ऐसे स्मारक केवल पत्थर या लोहे से बने ढांचे नहीं होते, बल्कि वे आने वाली पीढ़ियों को देश के इतिहास और स्वतंत्रता संघर्ष से जोड़ने का माध्यम भी होते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि स्मारक के आसपास नियमित सफाई और निगरानी होनी चाहिए।

उनकी प्रमुख मांगें हैं—

  • सेनानी स्तंभ के आसपास से अवैध पार्किंग हटाई जाए।
  • स्मारक परिसर में ठेले और अस्थायी दुकानें व्यवस्थित की जाएं।
  • नियमित साफ-सफाई की व्यवस्था हो।
  • आवारा मवेशियों और कुत्तों की समस्या पर नियंत्रण किया जाए।
  • गांधी उद्यान की टूटी बाउंड्री और अन्य व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जाए।
  • स्मारक की सुरक्षा और सम्मान के लिए पूरे साल निगरानी रखी जाए।

‘सिर्फ 15 अगस्त और 26 जनवरी को सजावट काफी नहीं’

स्थानीय निवासी अजय भासवानी ने गांधी उद्यान और सेनानी स्मारक की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताई। उनका कहना है कि सड़क चौड़ीकरण के बाद से यहां अव्यवस्था लगातार बढ़ी है। उन्होंने ठेले और अन्य गतिविधियों के अलावा शराबखोरी की समस्या का भी उल्लेख किया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि राष्ट्रीय पर्वों के दौरान स्मारक को रोशन और सजाकर जिम्मेदारी पूरी नहीं हो जाती। स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान के लिए पूरे वर्ष स्मारक की साफ-सफाई, सुरक्षा और रखरखाव जरूरी है।

उनका मानना है कि यदि गांधी उद्यान को व्यवस्थित तरीके से विकसित किया जाए तो यह शहर के लोगों के लिए एक बेहतर सार्वजनिक स्थल के साथ-साथ युवाओं और बच्चों के लिए इतिहास से जुड़ने का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।

सौंदर्यीकरण के लिए शासन को भेजा प्रस्ताव

मामले में नगर पालिका अध्यक्ष अरुण कौशिक ने कहा कि गांधी उद्यान शहर की धरोहर है। सड़क निर्माण के दौरान इसकी बाउंड्री तोड़ी गई थी। उद्यान के सौंदर्यीकरण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।

उन्होंने कहा कि राशि प्राप्त होते ही सौंदर्यीकरण का काम शुरू कराया जाएगा। स्मारक के आसपास अवैध पार्किंग और ठेले लगाए जाने की शिकायत पर उन्होंने कार्रवाई का भरोसा भी दिया।

अब स्थानीय लोगों की नजर इस बात पर है कि प्रस्ताव को मंजूरी कब मिलती है और गांधी उद्यान को वास्तविक रूप से कब नया स्वरूप मिलता है। फिलहाल ऐतिहासिक स्मारक के आसपास पसरी अव्यवस्था प्रशासन और नगर पालिका के लिए एक गंभीर सवाल बनी हुई है।

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