बिलासपुर / लोकसभा चुनाव के लिये छत्तीसगढ़ में भाजपा ने सभी ग्यारह सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दिया है, बीजेपी ने सांसद संतोष पाण्डेय को राजनांदगांव से तथा राज्यसभा सदस्य सरोज पाण्डेय को कोरबा से उम्मीदवार बनाया है।कांग्रेस भी लोकसभा के किसी एक सीट पर ब्राह्मण चेहरे पर दांव लगा सकती है, हमें मिली जानकारी के अनुसार रायपुर लोकसभा से कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव विकास उपाध्याय, और सुशील आनंद शुक्ला तथा बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र से पीसीसी सचिव राघवेन्द्र पाण्डेय तथा बिलासपुर कांग्रेस के पुर्व जिलाध्यक्ष राजेन्द्र शुक्ला के नाम पर विचार हो रहा है।
*पार्टी में ब्राह्मण युवा चेहरे की तलाश*

नंद कुमार बघेल के द्वारा भगवान राम और हिन्दू धर्म के खिलाफ दिये गये आपत्तीजनक बयानों से ब्राह्मण समाज बघेल सरकार से काफी नाराज थे। बिलासपुर में ब्राह्मण सम्मेलन के बहाने डेमेज कन्ट्रोल करने का प्रयास किया गया था,लेकिन पार्टी को ईसका कोई लाभ नही हुआ, विधान सभा चुनाव में कांग्रेस के ब्राह्मण उम्मीदवारों को भी अपने ही समाज की नाराजगी का सामना करना पड़ा था। रविन्द्र चौबे जैसे कद्दावर नेता चुनाव हार गये थे, महंत रामसुंदर दास प्रदेश में सर्वाधिक मतों से पराजित हुए थे। ईस बार लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ब्राह्मणों को साधने के लिए समाज के स्वच्छ छवि के युवा चेहरे पर दांव लगा सकती है, रायपुर या बिलासपुर किसी एक लोकसभा सीट पर कांग्रेस ब्राम्हण समाज से अपना उम्मीदवार उतार सकती है।
*राघवेन्द्र छात्र जीवन से सक्रिय है राजनीति में*
पीसीसी सचिव राघवेन्द्र पाण्डेय पार्टी में कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के करीबी माने जाते है, तथा पाण्डेय छात्र जीवन से राजनीति में सक्रिय है वे वर्ष 1995 में जांजगीर महाविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष थे, गुरू घासीदास विश्वविद्यालय बिलासपुर में वे उपाध्यक्ष थे, ईस दौरान वे बिलासपुर में रेल्वे जोन की मांग को लेकर छात्र आंदोलन से भी जुड़े थे। मध्य प्रदेश एनएसयुआई में वे महासचिव थे,राज्य गठन के बाद उन्हें छत्तीसगढ़ युवा कांग्रेस में सचिव की जिम्मेदारी दी गई थी ।
*सामाजिक पृष्ठभूमि से है पाण्डेय*
पीसीसी सचिव राघवेन्द्र पाण्डेय सामाजिक पृष्ठभूमि से आते है उनके पिता स्व.रामसरकार पाण्डेय प्रतिष्ठित समाज सेवक के रूप में याद किये जाते है,अविभाजित मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्व.रामसरकार पाण्डेय को कृषि रत्न से सम्मानित किया था। राघवेन्द्र भी सामाजिक सरोकार के क्षेत्र से जुड़े नेता के रूप में पहचाने जाते है।



