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20 वर्षीय युवती की एम एम आई नारायण हेल्थ अस्पताल में संदिग्ध मौत :_अस्पताल प्रबंधन मौन

रायपुर/29-11-2024 ::- चारामा की रहने वाली 20 वर्षीय युवती की रायपुर के पचपेड़ी नाका के पास स्थित नारायणा हेल्थ हॉस्पिटल में विगत दिनों निधन हो गया। इसकी खबर कुछ एक समाचार पत्रों में प्रकाशित हुए थे। इस बाबत हमारी मृतक के चाचा #कुबेर_सिंह_गजेंद्र के साथ दूरभाष पर बातचीत हुई जिसमें मृतक के चाचा कुबेर सिंह गजेंद्र ने बताया – मृतक वीणा गजेंद्र स्त्री रोग संबंधित जांच करवाने हेतु शाम को हॉस्पिटल में गई जहां डॉक्टर ने 10-15 मिनट का प्रोसीजर है कर बताया। इस हेतु रु 40,000/- उन्होंने हॉस्पिटल में जमा किए। प्रोसीजर में ऐसा क्या हुआ कि मृतक के सर सूज गए और नाक के पास खून दिखने लग गया ? मृत्यु पश्चात परिवार को बॉडी देखने नहीं दिया जा रहा था, लेकिन दवाब डालने पर बॉडी देखने दिया गया और रु 5 लाख का बिल हॉस्पिटल प्रबंधन के तरफ से परिवार को थमाया गया। जब परिवार ने इसका विरोध किया तो बिल को कम कर 3 लाख का बनाकर परिवार को दिया गया। फिर जब परिवार वालों ने प्रबंधन से बात किये तो बिना पैसे लिए डेड बॉडी को परिवार के हाथों सौंपा गया और जो डेथ सर्टिफिकेट हॉस्पिटल ने दिया उसमें मृत्यु होने का कारण #कार्डियो_पल्मोनरी_अरेस्ट बताया गया। मृतक वीना गजेंद्र के चाचा श्री कुबेर सिंह गजेंद्र से फ़ोन से बात करने के पश्चात हॉस्पिटल के बिल, डेथ सर्टिफिकेट आदि व्हाट्सएप्प कर भेजे।

*टिप्पणी ::* #परिवार_वालों_को_चाहिए_था_कि_वे_मृतक_का_पोस्टमॉर्टेम_करवाते_जो_परिवार_वालों_ने_नहीं_करवाया। पोस्टमॉर्टेम यदि होता तो मृत्यु का असली कारण सामने आता जिस पर परिवार अस्पताल प्रबंधन से सवाल करते। मेडिकल बिल की भी गहन से जांच होनी चाहिए कि प्रबंधन ने 5 लाख का बिल कैसे बनाया। ये बात दूसरी है कि प्रबंधन ने उक्त राशि को अंत मे नहीं लिया। #आज_निजी_हॉस्पिटल_एक_तरह_से_लूट_तंत्र_बन_गया_है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि वे मरीज के परिवार की हैसियत देखकर बिल बनाते हैं खासकर उन मरीजों का जो नगद देकर इलाज करवाते हैं। बाकी मेडिक्लेम, हेल्थ इन्शुरन्स वालों से इतना ज्यादा इसलिए नहीं कर सकते क्यों कि हॉस्पिटल और मेडिक्लेम/हेल्थ इन्शुरन्स से उनका बेड, दवाई इत्यादि पर करार होता है जिससे कि उस करार से ज्यादा पैसा वे नहीं ले सकते नहीं तो क्लेम अप्रूव नहीं होगा और बिल लटक जाएगा। कुछ इस तरह का मामला सितंबर 2024 में भी इसी हॉस्पिटल में हुआ था जहां मरीज को एयर एम्बुलेंस में ऑक्सीजन नहीं मिला और उनकी मृत्यु हो गई थी, जिस पर जांच कमेटी बनी और जांच रिपोर्ट बनाया गया था और हॉस्पिटल को भी कटघड़े में खड़ा किया गया था।

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