
नुआखाई भेंटघाट, सेवा सम्मान पर्व एवं युवा प्रबोधन कार्यक्रम
विषय : संस्कृति, सेवा और युवा शक्ति के माध्यम से विकसित भारत 2047 का संकल्प

रायपुर / महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित नुआखाई भेंटघाट, सेवा सम्मान पर्व एवं युवा प्रबोधन कार्यक्रम हमारे लिए गौरव और प्रेरणा का अविस्मरणीय अवसर रहा। मैं महामहिम राष्ट्रपति जी, छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका जी, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी तथा उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव जी एवं श्री विजय शर्मा जी सहित सभी अतिथियों और उपस्थित जनसमुदाय के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब जी, श्री टंकराम वर्मा जी, श्री श्याम बिहारी जायसवाल जी, विधायक श्री सुनील सोनी जी, श्री मोतीलाल साहू जी, श्री अनुज शर्मा जी, श्री इंद्र कुमार साहू जी, श्रीमती भावना बोहरा जी, श्री संपत अग्रवाल जी, जिला भाजपा अध्यक्ष श्री रमेश सिंह ठाकुर जी सहित निगम-मंडलों के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्षगण, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी, युवा तथा गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। सभी के सहयोग और सहभागिता के लिए मैं हृदय से धन्यवाद देता हूँ।
कार्यक्रम का उद्देश्य
इस आयोजन का उद्देश्य केवल सांस्कृतिक उत्सव मनाना नहीं, बल्कि संस्कृति, सामाजिक समरसता, सेवा और युवा सशक्तिकरण को एक साझा मंच पर लाना है। नुआखाई हमारी कृषि परंपरा, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, अन्नदाता किसान के सम्मान और पारिवारिक एकता का प्रतीक है। अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहकर आधुनिक विकास की ओर आगे बढ़ना ही इस आयोजन की मूल भावना है।
सेवा सम्मान पर्व के माध्यम से समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पण, जनसेवा तथा सामाजिक उत्तरदायित्व को प्रोत्साहित करना है। वहीं, युवा प्रबोधन का उद्देश्य युवाओं को शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार, स्वरोजगार, उद्यमिता, नवाचार और राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करना है। युवाओं को नशामुक्त जीवन, सकारात्मक सोच, अनुशासन और सेवा भाव अपनाने का संदेश देना भी इस कार्यक्रम का महत्वपूर्ण लक्ष्य है।
विकसित भारत @ 2047 की कल्पना
वर्ष 2047 में भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होंगे। विकसित भारत का हमारा संकल्प केवल आर्थिक समृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि एक ऐसे भारत का निर्माण करना है जो शिक्षित, आत्मनिर्भर, तकनीकी रूप से सक्षम, सामाजिक रूप से समरस और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध हो।
इस लक्ष्य की प्राप्ति में युवाओं की भूमिका निर्णायक है। आज के युवाओं को रोजगार पाने के साथ रोजगार सृजन करने वाला, तकनीक का उपयोग करने के साथ नवाचार करने वाला और व्यक्तिगत सफलता के साथ सामाजिक दायित्व निभाने वाला बनना होगा। शिक्षा, कौशल, उद्यमिता, डिजिटल सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता के माध्यम से युवा भारत की विकास यात्रा को नई गति दे सकते हैं।
हमारा विश्वास है कि जब युवा अपनी संस्कृति और संस्कारों से जुड़े रहेंगे, महिलाएँ विकास की मुख्यधारा में समान अवसर प्राप्त करेंगी, किसानों को सम्मान मिलेगा और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुँचेगा, तभी विकसित भारत का सपना साकार होगा।
कार्यक्रम का प्रभाव और संदेश
महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी की उपस्थिति ने इस आयोजन को विशेष प्रेरणा प्रदान की। उनका जीवन संघर्ष, सादगी, दृढ़ इच्छाशक्ति और राष्ट्रसेवा का प्रेरक उदाहरण है। उनकी उपस्थिति से युवाओं को यह संदेश मिला कि परिस्थितियाँ चाहे जैसी हों, शिक्षा, परिश्रम, आत्मविश्वास और समर्पण के बल पर सर्वोच्च लक्ष्य प्राप्त किए जा सकते हैं।
इस कार्यक्रम ने सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, सामाजिक एकता, सेवा भावना और युवा शक्ति की सकारात्मक भूमिका को नई दिशा देने का संदेश दिया। ऐसे आयोजन विभिन्न समाजों और पीढ़ियों के बीच संवाद, सहयोग और सहभागिता को बढ़ावा देते हैं तथा राष्ट्र निर्माण में सामूहिक जिम्मेदारी का बोध कराते हैं।
हमारा प्रयास है कि नुआखाई की सांस्कृतिक भावना को सेवा, सम्मान और संकल्प से जोड़ते हुए युवाओं में राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना मजबूत हो। विकसित भारत @ 2047 की यात्रा सरकार के प्रयासों के साथ-साथ नागरिकों की सक्रिय भागीदारी, सामाजिक संगठनों के सहयोग और युवाओं की ऊर्जा से ही सफल होगी।
अंत में, मैं महामहिम राष्ट्रपति जी सहित सभी अतिथियों, आयोजकों, सहयोगियों और उपस्थित नागरिकों के प्रति पुनः हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।
हमारा संकल्प है—संस्कृति का संरक्षण, सेवा का विस्तार, युवा शक्ति का सशक्तिकरण और विकसित भारत @ 2047 का निर्माण।
आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद।
नुआखाई जुहार ! जय हिंद! जय छत्तीसगढ़



