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नक्सल प्रभावित तरांदुल में पहली बार पहुंची सोनोग्राफी सुविधा, 25 गर्भवती महिलाओं की गांव में हुई जांच

उत्तर बस्तर कांकेर। कभी माओवादी गतिविधियों से प्रभावित और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र के रूप में पहचाने जाने वाले भानुप्रतापपुर विकासखंड के ग्राम तरांदुल में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को लेकर नई पहल सामने आई है। सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित सेवा सेतु सह मेगा स्वास्थ्य शिविर में पहली बार इस सुदूर पहाड़ी इलाके में सोनोग्राफी सुविधा पहुंचाई गई।

जिला प्रशासन की पहल पर आयोजित इस स्वास्थ्य शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं को सीधे ग्रामीणों तक पहुंचाया गया। खास तौर पर गर्भवती महिलाओं को गांव में ही सोनोग्राफी की सुविधा मिलने से उन्हें दूरस्थ स्वास्थ्य केंद्र या जिला मुख्यालय तक जाने की जरूरत नहीं पड़ी।

पहली बार गांव में मिली सोनोग्राफी की सुविधा

तरांदुल पहाड़ी और दुर्गम रास्तों के बीच बसा हुआ क्षेत्र है। यहां रहने वाली गर्भवती महिलाओं के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए लंबी दूरी तय करना चुनौतीपूर्ण रहा है। ऐसे में शिविर के दौरान गांव में ही सोनोग्राफी की सुविधा उपलब्ध कराना महिलाओं और उनके परिवारों के लिए राहत लेकर आया।

शिविर में आसपास के गांवों से पहुंचीं 25 गर्भवती महिलाओं की सोनोग्राफी और स्वास्थ्य जांच की गई। विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं गांव तक पहुंचने से महिलाओं को यात्रा और अतिरिक्त समय की परेशानी से राहत मिली।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र में बदली स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर

तरांदुल क्षेत्र लंबे समय तक माओवादी गतिविधियों से प्रभावित रहा है। ऐसे इलाकों में सरकारी सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है। अब क्षेत्र में परिस्थितियां बदलने के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं को भी ग्रामीणों के करीब ले जाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

मेगा स्वास्थ्य शिविर इसी बदलाव की एक तस्वीर के रूप में सामने आया। जहां पहले दुर्गमता और पहुंच बड़ी चुनौती थी, वहीं अब विशेषज्ञ चिकित्सक और आधुनिक स्वास्थ्य जांच सुविधाएं ग्रामीणों तक पहुंच रही हैं।

571 से अधिक लोगों का हुआ स्वास्थ्य परीक्षण

सेवा सेतु सह मेगा स्वास्थ्य शिविर में 571 से अधिक लोगों ने स्वास्थ्य परीक्षण कराया। जरूरतमंद मरीजों को निशुल्क दवाइयां भी उपलब्ध कराई गईं।

शिविर में अलग-अलग सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ भी लोगों को दिया गया।

शिविर में प्रमुख रूप से हुए कार्य:

  • 571 से अधिक लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण
  • 25 गर्भवती महिलाओं की सोनोग्राफी
  • 76 लोगों का आयुष्मान कार्ड पंजीयन
  • 162 लोगों की NCD जांच
  • 42 दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी
  • 90 लोगों का नेत्र परीक्षण
  • 32 लोगों को निशुल्क चश्मे वितरित

इस दौरान ग्रामीणों को एक ही स्थान पर जांच, चिकित्सकीय परामर्श और दवाइयों की सुविधा उपलब्ध हुई।

कई विशेषज्ञ चिकित्सकों ने दी सेवाएं

स्वास्थ्य शिविर में विभिन्न रोगों से संबंधित विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं उपलब्ध रहीं। ग्रामीणों को अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याओं के लिए विशेषज्ञ परामर्श मिला।

शिविर में इन सेवाओं की सुविधा रही:

  • स्त्री रोग विशेषज्ञ
  • मेडिसिन विशेषज्ञ
  • हड्डी रोग विशेषज्ञ
  • शिशु रोग विशेषज्ञ
  • नाक-कान-गला रोग विशेषज्ञ
  • मुख रोग विशेषज्ञ
  • नेत्र रोग विशेषज्ञ

इससे ग्रामीणों को सामान्य स्वास्थ्य जांच के साथ विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा भी अपने क्षेत्र में मिल सकी।

“सेवा वहीं, जहां जरूरत” की पहल

तरांदुल में आयोजित स्वास्थ्य शिविर को केवल एक सामान्य स्वास्थ्य शिविर के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। दुर्गम पहाड़ी इलाके में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं को पहुंचाने की यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की कोशिश को दर्शाती है।

कलेक्टर कुन्दन कुमार की पहल के तहत आयोजित इस शिविर का उद्देश्य यही रहा कि भौगोलिक दूरी, दुर्गम रास्ते या क्षेत्र की पुरानी चुनौतियां स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में बाधा न बनें।

गांव में ही सोनोग्राफी सुविधा मिलने से गर्भवती महिलाओं को राहत मिली और ग्रामीणों के बीच स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भरोसा भी मजबूत हुआ। तरांदुल जैसे सुदूर क्षेत्र में आधुनिक स्वास्थ्य सुविधा का पहुंचना ग्रामीणों के लिए बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में सामने आया है।

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