
कोंडागांव। जिले में गुम और चोरी हुए मोबाइल फोन की तलाश के लिए चलाए गए विशेष अभियान में कोंडागांव पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस की तकनीकी टीम ने लगातार प्रयास करते हुए 151 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। बरामद किए गए सभी मोबाइल उनके वास्तविक मालिकों को सौंप दिए गए हैं। मोबाइल वापस मिलने के बाद लोगों के चेहरे पर खुशी देखने को मिली।
पुलिस के मुताबिक, गुम मोबाइल फोन की बरामदगी के लिए तकनीकी माध्यमों का इस्तेमाल किया गया। जांच के दौरान मोबाइल फोन की तकनीकी जानकारी जुटाने के साथ यह भी पता लगाया गया कि उनका इस्तेमाल किन स्थानों पर किया जा रहा है।

अलग-अलग जिलों और राज्यों तक पहुंची पुलिस की टीम
मोबाइल फोन की तलाश के दौरान सामने आया कि बरामद किए गए कई फोन छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों के अलावा सीमावर्ती राज्यों में भी इस्तेमाल किए जा रहे थे। तकनीकी जानकारी के आधार पर पुलिस ने संबंधित स्थानों से संपर्क और समन्वय स्थापित किया।
इसके बाद पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए इन मोबाइल फोन को बरामद किया। इस अभियान में तकनीकी टीम की भूमिका महत्वपूर्ण रही। लगातार मॉनिटरिंग और तकनीकी जानकारी के आधार पर पुलिस उन मोबाइलों तक पहुंची, जिन्हें उनके वास्तविक मालिक गुम होने के बाद तलाश रहे थे।
एसपी ने वास्तविक मालिकों को सौंपे मोबाइल
बरामद किए गए 151 मोबाइल फोन पुलिस अधीक्षक पंकज चन्द्रा ने उनके वास्तविक मालिकों को सुपुर्द किए। पुलिस की इस कार्रवाई से उन लोगों को राहत मिली, जिन्होंने मोबाइल फोन गुम होने या चोरी होने के बाद उन्हें वापस पाने की उम्मीद छोड़ दी थी।
पुलिस का कहना है कि गुम मोबाइल की बरामदगी से न केवल नागरिकों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सकता है, बल्कि चोरी और मोबाइल के गलत इस्तेमाल पर भी रोक लगाने में मदद मिलती है।
साइबर अपराध को लेकर एसपी की अपील
मोबाइल फोन वापस करने के साथ ही एसपी पंकज चन्द्रा ने लोगों को साइबर अपराधों से बचने के लिए सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी लगातार ठगी के नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में किसी भी अनजान व्यक्ति पर भरोसा करके अपनी गोपनीय बैंकिंग जानकारी साझा करना भारी पड़ सकता है।
उन्होंने नागरिकों से खासतौर पर OTP, UPI PIN, ATM या डेबिट कार्ड की जानकारी, पासवर्ड और बैंक से जुड़ी गोपनीय जानकारी किसी अनजान व्यक्ति को नहीं देने की अपील की।
अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें
पुलिस ने लोगों को अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करने की भी सलाह दी है। इसके अलावा फर्जी KYC अपडेट, बैंक अधिकारी, पुलिस अधिकारी या कस्टमर केयर कर्मचारी बनकर की जाने वाली ठगी से भी सावधान रहने को कहा गया है।
पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर ठगी के तरीकों को लेकर भी लोगों को सतर्क किया। किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या लिंक पर जल्दबाजी में प्रतिक्रिया देने के बजाय उसकी सत्यता जांचने की सलाह दी गई है।
साइबर ठगी होने पर तुरंत करें शिकायत
पुलिस के अनुसार साइबर ठगी का शिकार होने पर सबसे महत्वपूर्ण है कि पीड़ित व्यक्ति शिकायत करने में देरी न करे। एसपी ने नागरिकों से कहा कि अगर किसी के साथ ऑनलाइन फ्रॉड होता है तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
इसके साथ ही नजदीकी पुलिस थाने को भी घटना की जानकारी देने की अपील की गई है। समय पर शिकायत मिलने से ठगी की रकम को ट्रेस करने और आगे की कार्रवाई में मदद मिल सकती है।
जागरूकता ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे बड़ा हथियार
कोंडागांव पुलिस ने लोगों से ऑनलाइन लेन-देन के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराध के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। इसलिए किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या संदेश को लेकर सावधानी जरूरी है।
151 गुम मोबाइल की बरामदगी के साथ कोंडागांव पुलिस ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि तकनीकी माध्यमों की मदद से गुम मोबाइल की तलाश और बरामदगी संभव है। वहीं नागरिकों की जागरूकता और सतर्कता साइबर ठगी रोकने में सबसे अहम भूमिका निभा सकती है।



