
कांकेर: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में जंगल में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। कोरर वन क्षेत्र के खड़का भुरका इलाके में स्थित कच्छ डोंगरी में सैकड़ों हरे-भरे पेड़ काटे जाने की बात सामने आई है। स्थानीय ग्रामीणों ने इस मामले को गंभीर बताते हुए जांच की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार, इलाके में लंबे समय से पेड़ों की कटाई की जा रही है। उनका दावा है कि वनाधिकार पट्टा हासिल करने की उम्मीद में जंगल के हिस्से को साफ करने के लिए बड़ी संख्या में हरे पेड़ों को काटा गया है। हालांकि, पेड़ों की कटाई के वास्तविक कारण और इसकी मात्रा की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

फोकस कीवर्ड: कच्छ डोंगरी
जंगल की निगरानी के दौरान सामने आया मामला
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि वे अपने जंगल और वन संपदा की सुरक्षा के लिए समय-समय पर इलाके का निरीक्षण करते हैं। इसी दौरान ग्रामीणों की नजर बड़ी संख्या में काटे गए पेड़ों पर पड़ी।
शुरुआत में कुछ स्थानों पर पेड़ कटे हुए दिखाई दिए। इसके बाद ग्रामीणों ने आसपास के इलाके में जाकर पड़ताल की तो कटाई का दायरा और अधिक बड़ा नजर आया।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो क्षेत्र में मौजूद प्राकृतिक वन संपदा को भारी नुकसान हो सकता है।
वनाधिकार पट्टे के लिए पेड़ काटने का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कुछ लोगों द्वारा वनाधिकार पट्टा हासिल करने के उद्देश्य से जंगल की जमीन पर पेड़ों की कटाई की गई है। उनका दावा है कि हरे-भरे पेड़ों को हटाकर जमीन को साफ किया जा रहा है।
हालांकि, यह आरोप जांच का विषय है। प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पेड़ों की कटाई किसने, कितने क्षेत्र में और किस उद्देश्य से की।
कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लिया
मामले की जानकारी मीडिया के माध्यम से सामने आने के बाद कांकेर कलेक्टर कुंदन कुमार ने इसे गंभीरता से लिया है। कलेक्टर ने बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की जानकारी की जांच कराने की बात कही है।
अब प्रशासन और वन विभाग की जांच में यह देखा जाएगा कि कच्छ डोंगरी क्षेत्र में वास्तव में कितने पेड़ काटे गए हैं, कटाई कब हुई और इसके पीछे कौन लोग जिम्मेदार हैं।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर
इस मामले में जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि आरोप वन क्षेत्र में हरे पेड़ों की कटाई से जुड़ा है। यदि जांच में अवैध कटाई की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि जंगल केवल जमीन का हिस्सा नहीं है, बल्कि इससे स्थानीय लोगों की आजीविका और पर्यावरण भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में जंगल की सुरक्षा के लिए प्रशासन को नियमित निगरानी और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।
अब जांच पर टिकी नजर
कच्छ डोंगरी में पेड़ों की कटाई का मामला सामने आने के बाद अब सबकी नजर प्रशासनिक जांच पर है। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि कितने पेड़ काटे गए, क्या कटाई नियमों के विपरीत हुई और वनाधिकार पट्टे से इसका कोई संबंध है या नहीं।
फिलहाल कलेक्टर द्वारा जांच के आश्वासन के बाद ग्रामीणों को उम्मीद है कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।



