
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) से जुड़े एक बड़े मामले ने सरकारी राशन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रायपुर ग्रामीण के मंदिर हसौद थाना क्षेत्र में संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकान से 1225 क्विंटल सरकारी चावल की कमी सामने आई है। खाद्य विभाग के अनुसार, गायब मिले चावल की कीमत करीब 50.09 लाख रुपये है। मामले में महिला स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष, विक्रेता और सहायक विक्रेता के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है।
मामला ग्राम पंचायत सेरीखेड़ी स्थित शासकीय उचित मूल्य दुकान आईडी-442001044 का है। यह दुकान वर्ष 2024 से श्री राधा मोहन महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा संचालित की जा रही थी। खाद्य विभाग की जांच और रिकॉर्ड के मिलान के बाद कथित गड़बड़ी सामने आई।

अचानक जांच में खुली राशन वितरण की पोल
खाद्य निरीक्षक देवेश देवदास ने कलेक्टर खाद्य शाखा के निर्देश पर मंदिर हसौद थाने में शिकायत दर्ज कराई। रिपोर्ट के मुताबिक, 30 अक्टूबर 2025 को दुकान का औचक निरीक्षण किया गया था।
इस दौरान कई हितग्राहियों ने दुकान के संचालन को लेकर शिकायतें कीं। लोगों का आरोप था कि दुकान नियमित रूप से नहीं खुलती थी। कुछ मामलों में मशीन पर पहले अंगूठा लगवाकर खाद्यान्न वितरण दर्ज कर दिया जाता था, जबकि वास्तविक चावल कथित तौर पर कई दिन बाद दिया जाता था।
जांच टीम ने दुकान के ऑनलाइन रिकॉर्ड और मौके पर मौजूद वास्तविक स्टॉक का मिलान किया। इसमें बड़ा अंतर सामने आया।
- ऑनलाइन रिकॉर्ड में 1012.42 क्विंटल चावल उपलब्ध दिखाया गया था।
- मौके पर केवल 35 क्विंटल चावल मिला।
- पहली जांच में ही करीब 977.42 क्विंटल चावल की कमी पाई गई।
- बाद की विस्तृत जांच में यह कमी बढ़कर 1225 क्विंटल हो गई।
दूसरी जांच में सामने आई 50 लाख की कमी
पहली जांच के बाद खाद्य विभाग ने दुकान के संचालन में मिली अनियमितताओं को गंभीरता से लिया और दुकान को अस्थायी रूप से दूसरी संस्था को सौंप दिया गया। इसके बाद 23 नवंबर 2025 को दोबारा भौतिक सत्यापन कराया गया।
इस दौरान ऑनलाइन स्टॉक, विभिन्न योजनाओं के तहत आवंटित खाद्यान्न और उपलब्ध रिकॉर्ड का विस्तृत मिलान किया गया। जांच में कुल 1225 क्विंटल चावल की कमी सामने आई।
खाद्य विभाग ने इस चावल की कीमत 50 लाख 9 हजार 956 रुपये निर्धारित की है। विभाग के अनुसार, यह शासन को हुई प्रत्यक्ष आर्थिक क्षति है।
नोटिस के बाद भी नहीं दिया जवाब
विभाग के मुताबिक, दुकान में गड़बड़ी सामने आने के बाद संचालक संस्था को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। हालांकि, नोटिस का जवाब नहीं दिया गया। इसके अलावा कम पाए गए सरकारी चावल की भरपाई भी नहीं की गई।
इसके बाद कलेक्टर खाद्य शाखा के आदेश पर संबंधित लोगों के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज कराने की कार्रवाई की गई।
इन तीन लोगों पर दर्ज हुई FIR
मामले में श्री राधा मोहन महिला स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष माया यादव, विक्रेता अंजू यादव और सहायक विक्रेता हरिशंकर साहू को आरोपी बनाया गया है।
पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ:
- आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3/7
- भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4)
- BNS की धारा 3(5)
के तहत अपराध दर्ज किया है।
अब पुलिस करेगी रिकॉर्ड और लेन-देन की जांच
एफआईआर दर्ज होने के बाद मंदिर हसौद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच में सरकारी खाद्यान्न के आवंटन से लेकर दुकान तक पहुंचने, ऑनलाइन एंट्री, हितग्राहियों को वितरण और वास्तविक स्टॉक से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जाएगी।
इसके साथ ही पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश करेगी कि रिकॉर्ड में दर्ज और मौके पर उपलब्ध चावल के बीच इतना बड़ा अंतर कैसे पैदा हुआ। वित्तीय लेन-देन और संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।
1225 क्विंटल सरकारी चावल की कमी और करीब 50 लाख रुपये के मूल्य का यह मामला सामने आने के बाद अब राशन दुकान के संचालन और खाद्यान्न वितरण व्यवस्था की निगरानी पर भी सवाल उठ रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सरकारी चावल की इतनी बड़ी कमी के पीछे वास्तविक कारण क्या था और इसमें किसकी कितनी भूमिका रही।



