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बस्तर के संसाधन ही नहीं, स्थानीय युवाओं के सपने भी छीन रही है भाजपा सरकार -कांग्रेस

विगत ढ़ाई वर्षों में एनएमडीसी बस्तर में कुल 1173 भर्तियों में से केवल 275 स्थानीय?

रायपुर / भाजपा सरकार पर स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध नहीं कराने का आरोप लगाते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि देश को सर्वाधिक लौह अयस्क देने वाले बस्तर में राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) उत्पादन और मुनाफे के लगातार रिकॉर्ड बना रही है लेकिन बस्तर के स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के मामले में बेहद निराश किया है। लोकसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार 2023 से 2025 के दौरान बैलाडीला, बचेली, किरंदुल और नगरनार में एनएमडीसी में कुल 1173 भर्तियां की गई जिनमें से बस्तर के केवल 275 युवाओं को ही अवसर मिला। 2025 में हुई कुल 710 नियुक्तियों में केवल 66 अभ्यर्थी (मात्र 9 प्रतिशत) बस्तर के स्थानीय हैं, 91 प्रतिशत बाहरी। कौशल विकास और स्थानीय युवाओं को रोजगार का सरकारी दावा झूठा साबित हो रहा है। जिस जमीन से खनिज निकल रहा है वहीं के युवा पीछे धकेले जा रहे हैं।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि बस्तर के जल, जंगल, जमीन और खनिज संसाधनों के बल पर एनएमडीसी अनाप-शनाप मुनाफा कमा रही है, लेकिन रोजगार के अवसर देने में यहां के युवाओं से भेदभाव क्यों? बस्तर में बेरोजगारी तेजी से बढ़ रही है, हजारों युवाओं के सपनों पर पलायन की मजबूरी भारी पड़ रहा है, यहां के युवा तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल जैसे राज्यों के बड़े शहरों की ओर पलायन के लिए मजबूर हैं। केवल बस्तर संभाग में ही करीब 1 लाख 91 हजार पढ़े लिखे युवा रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं, ये आंकड़े रोजगार कार्यालय में पंजीकृत हैं, इसके अलावा भी निराश युवा हैं जिन्होंने उम्मीद छोड़कर पंजीयन ही नहीं कराया। यह केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि उन लाखों सपनों की कहानी है, जो हर साल डिग्री, डिप्लोमा और तकनीकी शिक्षा हासिल करने के बाद भी रोजगार के इंतजार में टूट रहे हैं, आदिवासी क्षेत्र में युवाओं को रोजगार उपलब्ध नहीं हो रहा है, यह सरकार युवाओं का भरोसा खो चुकी है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि डबल इंजन भाजपा सरकार में छत्तीसगढ़ के युवाओं का अधिकार छीना जा रहा है। केंद्रीय नवरत्न कंपनी एनएमडीसी अपनी कमाई का 90 प्रतिशत हिस्सा केवल बस्तर से ही प्राप्त करती है लेकिन जब देने की बारी आती है तो छत्तीसगढ़ के युवाओं से धोखा किया जाता है, एनएमडीसी का मुख्यालय छत्तीसगढ़ में स्थापित हो ताकि रोजगार के साथ ही केंद्रीय करो में राज्य का हिस्सा भी छत्तीसगढ़ की प्रात हो सके। भाजपा की सरकार और सरकारी विभाग केवल प्लेसमेंट कैंप तक सीमित रह गई हैं, जहां मिलने वाले रोजगार कम वेतन, अस्थायी नियुक्ति और दूसरे राज्यों में पलायन की शर्तों के साथ आते हैं. ऐसे में बस्तर के युवा अब पलायन करने को मजबूर हैं. बस्तर के युवा ही अपनी प्रतिभाओ को लेकर बाहर रहेंगे तो बस्तर का विकास कैसे होगा?

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