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प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में पंचायतें निभाएं संरक्षक की भूमिका : अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा

रायपुर, प्राकृतिक सामुदायिक संसाधनों के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रबंधन में पंचायतों की भूमिका को और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से जिला पंचायत रायपुर द्वारा फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी (एफईएस) तथा राज्य ग्रामीण विकास संस्थान (एसआईआरडी) के सहयोग से एक दिवसीय पंचायत सम्मेलन का आयोजन ठाकुर प्यारेलाल पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान, निमोरा में किया गया। सम्मेलन में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, ग्राम पंचायत विकास योजना, जल एवं भूमि प्रबंधन, कानूनी प्रावधानों तथा पंचायतों के सफल नवाचारों पर विस्तार से चर्चा की गई।

रायपुर जिले के सरपंचों ने साझा किए नवाचार, जल संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और ग्राम विकास के सफल मॉडल

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा ने कहा कि बदलते समय के अनुरूप पंचायतों को भी आधुनिक कार्यप्रणाली अपनानी होगी। विशेषकर रायपुर जैसे तेजी से औद्योगिक होते जिले में कृषि, पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन स्थापित करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण पंचायत प्रतिनिधियों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े कानूनी प्रावधानों और उनकी जिम्मेदारियों को समझने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि आज ग्राम विकास में ग्राम सभा की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। ग्राम विकास योजनाओं में प्राकृतिक संसाधनों को शामिल कर उनके सतत उपयोग की रणनीति तैयार करनी होगी। साथ ही कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन, नल-जल योजनाओं का नियमित संचालन एवं रखरखाव तथा जल, जंगल और भूमि के संरक्षण को पंचायतों की प्राथमिकता बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंचायतें यदि संसाधनों की संरक्षक की भूमिका को प्रभावी ढंग से निभाएं तो सतत विकास के लक्ष्य अधिक तेजी से प्राप्त किए जा सकते हैं।

रायपुर जिले के सरपंचों ने साझा किए नवाचार, जल संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और ग्राम विकास के सफल मॉडल

*ग्राम को अपना समझकर करें कार्य : कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह*
रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने कहा कि यह पहला अवसर है जब विभिन्न ग्राम पंचायतों के सरपंच स्वयं मंच पर आकर अपने गांवों में किए गए नवाचारों और विकास कार्यों को साझा कर रहे हैं। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से ग्राम प्रमुख के रूप में गांव को अपना परिवार मानकर कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि पंचायत प्रतिनिधि पूरी जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ कार्य करेंगे तो शिकायतों और निरीक्षणों की आवश्यकता स्वतः कम हो जाएगी तथा शासन-प्रशासन की भूमिका केवल मार्गदर्शक की रह जाएगी। उन्होंने विकसित भारत-ग्राम रोजगार एवं आजीविका मिशन (वीबी-जी रामजी) का उल्लेख करते हुए कहा कि यह नई पहल ग्राम पंचायतों को अधिक अधिकार, संसाधन और विकास के अवसर प्रदान करेगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में समग्र विकास को नई गति मिलेगी।

रायपुर जिले के सरपंचों ने साझा किए नवाचार, जल संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और ग्राम विकास के सफल मॉडल

*सरपंचों ने प्रस्तुत किए प्रेरणादायी नवाचार*
सम्मेलन में विभिन्न ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने अपने गांवों में किए गए उल्लेखनीय कार्यों को साझा किया। जिसमें जनपद पंचायत अभनपुर के ग्राम सोनेसिली के सरपंच श्री अजय कुमार साहू ने बताया कि उनकी पंचायत ने 126 एकड़ शासकीय भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया है। इस भूमि को वृक्षारोपण, खेल मैदान एवं चारागाह के रूप में विकसित किया जा रहा है, जबकि 5 एकड़ भूमि सामाजिक कार्यों के लिए सुरक्षित रखी गई है।

सरपंच श्री हेमंत वर्मा ने बताया कि पूर्ववर्ती मनरेगा के माध्यम से किए गए जल संरक्षण कार्यों के परिणामस्वरूप 72 एकड़ क्षेत्र को आर्द्रभूमि (वेटलैंड) के रूप में संरक्षित किया गया है, जहां 108 प्रवासी पक्षियों के संरक्षण हेतु पक्षी विहार विकसित किया जा रहा है। इससे जैव विविधता संरक्षण के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। महिला स्व-सहायता समूहों को भी इस पहल से जोड़ा गया है तथा ग्राम के तालाबों की सफाई जनभागीदारी से की जा रही है।

ग्राम गौरखेड़ा (जनपद पंचायत तिल्दा) की सरपंच श्रीमती तुलेश्वरी यादव ने बताया कि उनकी पंचायत को महिला हितैषी पंचायत घोषित किया गया था, जिसके लिए उन्हें दिल्ली में सम्मानित भी किया गया। ग्राम में नशामुक्ति, स्वच्छता और टीकाकरण के साथ महिलाओं को आटा चक्की, मुर्गीपालन, बकरीपालन तथा किराना दुकान जैसे स्वरोजगार से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाया गया है।

जनपद पंचायत आरंग के ग्राम कठिया की सरपंच श्रीमती त्रिवेणी वर्मा ने बताया कि पंचायत द्वारा प्राकृतिक संसाधनों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर उनके सतत उपयोग के लिए ग्राम स्तर पर योजना बनाई गई है। पेड़ों के संरक्षण, चरागाह विकास और जल स्रोतों के संरक्षण जैसे कार्यों को ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) में शामिल कर व्यवस्थित रूप से क्रियान्वित किया जा रहा है।

ग्राम तूता के सरपंच श्री भरत बैस ने बताया कि ग्रामवासियों के सहयोग से 1500 ग्राफ्टेड आम के पौधों के साथ गेंदा की खेती की जा रही है। गांव में अवैध नशे के कारोबार पर रोक लगाई गई है तथा सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निगरानी कर सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फैलाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाती है। इसके साथ ही पंचायत द्वारा मैरिज हॉल, गार्डन तथा युवाओं के कौशल विकास से जुड़े कार्य भी किए जा रहे हैं।

ग्राम तोरला के सरपंच श्री ओमकार प्रसाद बंजारे ने भी अपने गांव में चलाए जा रहे स्वच्छता एवं नशामुक्ति अभियान की जानकारी साझा की।

*खेल-खेल में सीखा ग्राम विकास का मॉडल*

सम्मेलन के दौरान सभी जनप्रतिनिधियों को पांच समूहों में विभाजित कर सहभागितापूर्ण गतिविधियों एवं खेल-आधारित अभ्यासों के माध्यम से ग्राम विकास, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन तथा पंचायतों की भूमिका के विभिन्न आयामों पर प्रशिक्षण दिया गया। सम्मेलन का उद्देश्य पंचायत प्रतिनिधियों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, कानूनी अधिकारों, संस्थागत व्यवस्थाओं और सफल मॉडलों से परिचित कराना था, ताकि वे अपने गांवों में इनका प्रभावी क्रियान्वयन कर सकें।

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