
रायपुर। नवजात बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाने वाला एक मामला सामने आया है। तेलंगाना के महबूबनगर जिले में कथित तौर पर एक माता-पिता द्वारा अपने एक महीने के बच्चे को एक लाख रुपये में बेचने का मामला सामने आया है। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बच्चे को सकुशल बरामद कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
इस मामले में पुलिस ने नवजात को खरीदने वाले व्यक्ति और एक बिचौलिए के खिलाफ केस दर्ज किया है। फिलहाल किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
पुलिस के अनुसार, यह मामला महबूबनगर जिले के तेलुगुगुडेम गांव का है। एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) के अधिकारी की शिकायत के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई शुरू की।
अधिकारी की शिकायत पर—
- 17 जुलाई को मामला दर्ज किया गया।
- नवजात को खरीदने वाले व्यक्ति और बिचौलिए को आरोपी बनाया गया।
- पुलिस ने बच्चे की तलाश शुरू की।
पुलिस ने बच्चे को सकुशल बचाया
जांच के दौरान पुलिस टीम ने महबूबनगर शहर में उस व्यक्ति का पता लगाया, जिसके पास बच्चा था। इसके बाद बच्चे को सुरक्षित बरामद कर लिया गया।
बरामद किए गए नवजात को आगे की देखभाल और संरक्षण के लिए चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) को सौंप दिया गया है।
मजदूर परिवार से हैं बच्चे के माता-पिता
पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बच्चा जून महीने में पैदा हुआ था। बच्चे के माता-पिता मजदूरी का काम करते हैं।
आरोप है कि करीब दो सप्ताह पहले उन्होंने एक बिचौलिए के माध्यम से बच्चे को बेच दिया था।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि—
- बच्चे को बेचने की असली वजह क्या थी?
- इस मामले में और कौन-कौन लोग शामिल हैं?
- क्या पहले भी इस तरह की कोई घटना हुई है?
- पैसे के लेन-देन में किन लोगों की भूमिका रही?
परिवार में पहले से हैं तीन बच्चे
पुलिस के मुताबिक, बच्चे के माता-पिता के पहले से ही तीन बच्चे हैं, जिनमें दो बेटे और एक बेटी शामिल हैं।
जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि आर्थिक परेशानी, पारिवारिक दबाव या किसी अन्य कारण से यह कदम उठाया गया या नहीं।
अभी तक नहीं हुई गिरफ्तारी
पुलिस ने बताया कि मामले में अभी तक किसी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस बिचौलिए और बच्चे को खरीदने वाले व्यक्ति से जुड़े सभी तथ्यों की जांच कर रही है।
बच्चों की सुरक्षा पर उठे सवाल
यह घटना एक बार फिर नवजात बच्चों की सुरक्षा और अवैध खरीद-फरोख्त रोकने की जरूरत को सामने लाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों से जुड़े मामलों में तुरंत कार्रवाई और मजबूत निगरानी व्यवस्था बेहद जरूरी है।
प्रशासन और बाल संरक्षण विभाग की कोशिश रहती है कि ऐसे मामलों में बच्चों को सुरक्षित वातावरण मिले और उनके अधिकारों की रक्षा की जा सके।
मामले की जांच जारी
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। बच्चे को सुरक्षित संरक्षण में भेज दिया गया है और आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद मामले में शामिल सभी लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।



