
विकास उपाध्याय ने राजधानी रायपुर के विभिन्न रथयात्रा में उपस्थित होकर महाप्रभु जगन्नाथ जी के चरणों में शीष नवाया
रायपुर। प्रभु जगन्नाथ रथयात्रा पावन महोत्सव में पूर्व संसदीय सचिव, छाया सांसद और पश्चिम विधानसभा के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी राजधानी रायपुर के विभिन्न रथयात्रा में शामिल हुये। इस अवसर पर राजधानी रायपुर के विभिन्न रथयात्रा में शामिल होकर विकास उपाध्याय ने महाप्रभु जगन्नाथ जी के चरणों में शीष नवाया और प्रभु जगन्नाथ जी की रथ की रस्सी को खींचकर छत्तीसगढ़ प्रदेश वासियों की सुख समृद्धि के लिये कामना की।

रथयात्रा के महत्व को बताते हुये उपाध्याय ने कहा कि प्रतिवर्ष भगवान जगन्नाथ जी की रथ यात्रा मुख्य रूप से भक्तों को दर्शन देने एवं भगवान श्रीकृष्ण और बलराम जी अपनी मौसी (गुंडिचा मंदिर) जाने की खुशी में निकाली जाती है। पौराणिक मान्यता है कि एक बार माता सुभद्रा ने नगर भ्रमण की इच्छा जताई थी, जिसे पूरा करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण (जगन्नाथ) और बलभद्र उन्हें रथ पर बैठाकर बाहर निकले थे। इस यात्रा के पीछे जुड़े मुख्य कारण और धार्मिक महत्व यह हैं कि प्रभु स्वयं चलकर भक्तों तक आते हैं। माना जाता है कि जो भक्त किन्हीं कारणों से मंदिर तक नहीं पहुंच पाते, उनके लिए भगवान साल में एक बार स्वयं मंदिर से बाहर निकलकर सड़क पर आते हैं। मौसी का घर- हर साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा पुरी स्थित अपने मुख्य मंदिर से गुंडिचा मंदिर (जिसे उनकी मौसी का घर माना जाता है) जाते हैं। मोक्ष की प्राप्ति- हिंदू धर्म में मान्यता है कि जो श्रद्धालु सच्चे भाव से रथ की रस्सी खींचते हैं, उनके सारे पाप धुल जाते हैं और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। सांस्कृतिक एकता- इस यात्रा में जाति, धर्म और वर्ग का भेद मिट जाता है और सभी भक्त मिलकर भगवान का रथ खींचते हैं।



