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छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था देश में सबसे ज्यादा बदहाल – कांग्रेस

सरकार की प्राथमिकता के लोगों को स्वास्थ्य और इलाज नही

रायपुर/ भाजपा की सरकार बनने के बाद राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल हो गयी है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि यह बेहद चिंता का विषय है कि स्वास्थ सुविधा देने में छत्तीसगढ़ सरकार अन्य राज्यों की अपेक्षा फिसड्डी है।छत्तीसगढ़ में जिन मरीजों की मौते हो रही है।उनमें से 60 प्रतिशत से अधिक मरीजो की मौत केवल इसलिये हो रही है कि उनका समय पर ईलाज एक प्रशिक्षित डॉक्टर और स्टाफ से नहीं हो पाता है। सेंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) की हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि छत्तीसगढ़ में होने वाली कुल मौतो के पीछे एक बड़ा कारण ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशिक्षित डॉक्टरो की कमी है। पूरे देश में छत्तीसगढ़ इस प्रकार की मौतो के मामलो में बिहार और झारखंड के बाद तीसरे स्थान पर है।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि भाजपा सरकार की प्राथमिकता में लोगो का ईलाज है ही नही, भाजपा सरकार के लिये स्वास्थ्य विभाग केवल भ्रष्टाचार करने का अड्डा मात्र बना हुआ है। प्रदेश के वर्तमान 10 मेडिकल कालेजो में 2660 स्वीकृत पदो में से 1290 पद लगभग आधे खाली पड़े है। ऐसे में मरीजो का कैसे ईलाज होगा। स्वास्थ्य केन्द्र, उपस्वास्थ्य केन्द्रो में 65 प्रतिशत स्थानों तथा जिला अस्पतालो में 60 प्रतिशत पद खाली पड़े है। राज्य के सरकारी अस्पतालो में ईलाज कम भ्रष्टाचार अधिक होता है। प्रदेश के अधिकांश सरकारी अस्पतालो मेडिकल कालेजो में नकली दवाये उपयोग की शिकायते सामने आ चुकी है।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि बेहद शर्मनाक है कि राज्य के लोगो की बड़ी उम्मीद मेकाहारा रायपुर तथा डीकेएस अस्पताल भी अव्यवस्था और सरकार की लापरवाही का शिकार है। मेकाहारा में करोड़ो की मशीने स्टालेशन के आभाव में तथा योग्य चिकित्सको होने के बाद मेकाहारा में सुविधाये नहीं होने के कारण लोगो के ईलाज में देरी होती है। सरकार कभी दवाई नहीं उपलब्ध करवा पाती तो कभी एक्सरे फिल्म, तो कभी पैथालाजी के सामन। प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि सरकार की लापरवाही और बदनियती के चलते ही छत्तीसगढ़ में मरीज जांच, इलाज और दवा के अभाव में बे-मौत मरने मजबूर हैं। नकली और अमानक दवाएं मरीजों को दी जा रही हैं। सरकारी अस्पतालों में दी जा रही कई दवाएं गुणवत्ता जांच में फेल हो रही है। समय पर एम्बुलेंस की सुविधा मरीजों को नहीं मिल पा रही है। सिटी स्कैन, एम आर आई, सोनोग्राफी, एक्स रे और खून पेशाब की जांच के लिए मरीज भटक रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी की सरकार में कमीशनखोरी के लिए स्वास्थ्य विभाग अघोषित तौर पर ठेके में संचालित है। सत्ता के संरक्षण में केवल मुनाफाखोरी का खेल चल रहा है। अक्षम स्वास्थ्य मंत्री तत्काल अपने पद से इस्तीफा दे या उन्हें बर्खास्त करे सरकार।

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