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चारामा में आबादी जमीनों की कीमत करोड़ों के पार

राजस्व नियमों को ताक पर रखकर आबादी जमीनों की खरीदी-बिक्री का धड़ल्ले से चल रहा खेल

चारामा / कांकेर जिले की चारामा तहसील मुख्यालय में आबादी भूमि की कीमतें अब करोड़ों के पार पहुंच चुकी हैं। बढ़ती मांग और शहरी विस्तार के बीच यहां राजस्व नियमों को दरकिनार कर आबादी जमीनों की खरीदी-बिक्री का खेल खुलेआम जारी है। सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले में जमीन दलालों और कुछ राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से बड़े स्तर पर अनियमितताएं की जा रही हैं।
मिली जानकारी के मुताबिक, आबादी सर्वे पंजी और राजस्व अभिलेखों में कथित रूप से छेड़छाड़ कर नामांतरण (म्यूटेशन) की प्रक्रिया को प्रभावित किया जा रहा है। आरोप है कि कूटरचना (फर्जी दस्तावेज तैयार करना) के जरिए कई जमीनों का नामांतरण किया गया है, साक्ष्य के रुप में जिसके दस्तावेजी प्रमाण भी सामने आए हैं। यह भी बताया जा रहा है कि नामांतरण के लिए दलालों और संबंधित कर्मचारियों के बीच बड़ी रकम की डील होती है।
राजस्व नियमों के अनुसार, आबादी भूमि की खरीदी-बिक्री और नामांतरण की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए तथा प्रत्येक लेन-देन की जानकारी संबंधित तहसीलदार कार्यालय को देना अनिवार्य है। छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता के तहत किसी भी प्रकार के नामांतरण के लिए वैध दस्तावेज, मूल अभिलेखों का सत्यापन और सक्षम अधिकारी की अनुमति आवश्यक होती है। इसके बावजूद चारामा क्षेत्र में इन नियमों की अनदेखी कर गुपचुप तरीके से जमीनों का हस्तांतरण किया जा रहा है।
सूत्रों का यह भी दावा है कि कई मामलों में तहसीलदार को खरीदी-बिक्री की जानकारी तक नहीं दी जाती, जिससे पूरी प्रक्रिया संदिग्ध हो जाती है। मामले के उजागर होने के बाद जमीन दलालों और संबंधित लोगों के बीच हड़कंप की स्थिति बन गई है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में बड़े पैमाने पर विवाद और कानूनी जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए तथा राजस्व अभिलेखों को डिजिटल माध्यम से सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जाए।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेते हुए जांच आगे बढ़ाता है और क्या वास्तव में इस अवैध खेल पर लगाम लग पाती है या नहीं।

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