Featureराष्ट्रीयव्यापार

ईरान युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों के असर से निफ्टी 10% गिरा, निवेशकों को हुआ 14 लाख करोड़ रुपये का नुकसान

Stock Market Crash: सोमवार का दिन भी शेयर बाजार के लिए अबतक अच्छा नहीं रहा है। ईरान युद्ध चौथे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है। जिसकी वजह से कच्चे तेल की कीमतें सातवें आसमान पर हैं। इन सबका बुरा असर घरेलू शेयर बाजारों पर साफ देखने को मिल रहा है। सेंसेक्स आज 1972 अंक की गिरावट के बाद 72560.19 अंक के इंट्रा-डे लो लेवल पर आ गया। वहीं, निफ्टी भी भारी गिरावट के बाद 22478.15 अंक के इंट्रा-डे लेवल तक आ गया था। बता दें, 9 अप्रैल 2025 के बाद निफ्टी अपने न्यूनतम स्तर पर है।

ईरान युद्ध का असर घरेलू शेयर बाजारों पर कितना पड़ा है इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि 28 फरवरी से अबतक निफ्टी 10 प्रतिशत लुढ़क चुका है। वहीं, टाइफ टाइम से यह 14 प्रतिशत नीचे गिरा है।

युद्ध का शेयर बाजार पर बुरा असर

अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध का बुरा असर शेयर बाजारों पर पड़ा है। जिसकी वजह से निवेशकों के सेंटीमेंट को झटका लगा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने की वजह से वैश्विक स्तर पर ऊर्जा का संकट खड़ा हो गया है। क्रूड ऑयल का रेट 110 डॉलर का पार कर गया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह युद्ध कबतक चलेगा इसको लेकर कुछ भी स्पष्ट नहीं हो रहा है।

मनी कंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार जियोजित इन्वेस्टमेंट्स से जुड़े एक्सपर्ट का कहना है कि भारी उतार और चढ़ाव की वजह से एक बार फिर से 22,000 का स्तर फोकस में आ गया है।

निवेशकों के 14 लाख करोड़ रुपये डूबे

शेयर बाजार में भारी गिरावट की वजह से निवेशकों को 14 लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। आज बीएसई 250 इंडेक्स 4 प्रतिशत नीचे गिरा है। बता दें, बीएसई की लिस्टेड कंपनियों का मार्केट एक वक्त पर 415 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया था।

रुपया पहुंचा रिकॉर्ड लो लेवल पर

डॉलर के मुकाबले रुपया आज सोमवार को और कमजोर हो गया। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार 18 पैसे की गिरावट के बाद 1 डॉलर की कीमत सोमवार को 93.8925 रुपये हो गया है। युद्ध शुरू होने के बाद घरेलू रुपया 3 प्रतिशत तक लुढ़क गया है।

FPI की तरफ से जारी बिकवाली

अमेरिकी-ईरान युद्ध के शुरू होने से अबतक घरेलू बाजारों से एफपीआई ने 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री की है। एनएसडीएल के डाटा के अनुसार एफपीआई ने 103967 करोड़ रुपये की निकासी की है।

Related Articles

Back to top button