
सरगुजा में गजराजों का कहर, उदयपुर में 26 हाथियों का दल, शाम ढलते ही सूना हो रहा गांव
अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के अंतर्गत उदयपुर वन परिक्षेत्र में जंगली हाथियों की मौजूदगी ने ग्रामीणों का सामान्य जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांवों में शाम ढलते ही सन्नाटा पसर जाता है। ग्रामीणों के लिए सूरज डूबने का अर्थ अब घर लौटना नहीं, बल्कि जान बचाने के लिए अपने ही घरों को छोड़ना बन गया है।
पिछले तीन महीनों से 26 हाथियों का एक विशाल दल इस इलाके में डेरा जमाए हुए है, जिसके खौफ से ग्रामीण रात होते ही अपने बच्चों और बुजुर्गों को लेकर जंगल से सटे कच्चे घरों से निकलकर पक्के मकानों अथवा सरकारी स्कूलों में पनाह लेने को मजबूर हैं।
उदयपुर के जंगलों में मौजूद हाथियों का यह झुंड अलग-अलग समय पर आए तीन दलों का संयुक्त कुनबा है। वन विभाग के अनुसार, एक अकेला हाथी तीन माह से अधिक समय से यहां मौजूद है। इसके बाद डेढ़ महीने पहले 14 हाथियों का दल आया और करीब 20 दिन पहले 12 अन्य हाथी भी इसमें शामिल हो गए। पहले इस समूह में कुल 27 हाथी थे, लेकिन विचरण के दौरान करंट लगने से एक बच्चे की मौत के बाद अब इनकी संख्या 26 रह गई है। दिनभर ये हाथी करमकठरा के घने जंगलों में शांत रहते हैं, लेकिन शाम होते ही भोजन की तलाश में दो, तीन और चार के छोटे-छोटे समूहों में बंटकर लगभग 10 किलोमीटर के दायरे में फैल जाते हैं।
हाथियों के ये दल जजगी, महेशपुर, लक्ष्मणगढ़, फुनगी, सीसकालो, उपका, सुखरीभंडार, रामनगर और झीरमिटी सहित एक दर्जन से अधिक गांवों के खेतों को निशाना बना रहे हैं। खेतों में तैयार खड़ी धान की फसल को हाथी रातभर रौंदते और खाते हैं। विशेषकर रामनगर में हाथियों ने फसलों को भारी नुकसान पहुंचाने के साथ कुछ कच्चे मकानों की दीवारें भी गिरा दी हैं। यही नहीं, उदयपुर से केदमा होकर बिलासपुर राष्ट्रीय राजमार्ग को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर हाथियों की आवाजाही के चलते वन अमले को अक्सर यातायात रोकना पड़ता है। डर के कारण ग्रामीणों ने जंगल जाकर लकड़ी और पत्ते एकत्र करना भी पूरी तरह बंद कर दिया है।
वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि क्षेत्र में हाथियों के अनुकूल प्राकृतिक पर्यावास उपलब्ध होने के कारण वे यहां से अन्यत्र नहीं जा रहे हैं। घने जंगलों में प्राकृतिक नाले, गांवों के लबालब तालाब और खेतों में लहलहाती धान की फसल के रूप में हाथियों को भरपूर चारा और पानी मिल रहा है। इसके अतिरिक्त दल में कई छोटे शावक भी शामिल हैं। शावकों की गति धीमी होने के कारण पूरा झुंड लंबी दूरी तय करने के बजाय सुरक्षित और साधन संपन्न इलाके में ही ठहरा हुआ है।
हाथियों के लंबे प्रवास और व्यापक तबाही के बावजूद अब तक क्षेत्र में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है। रेंजर फेंकू प्रसाद चौबे के नेतृत्व में वन विभाग की टीमें चार विशेष वाहनों से हाथियों के मूवमेंट पर चौबीसों घंटे सैटेलाइट व मैदानी ट्रैकिंग कर रही हैं। वन अमला गांवों में मुनादी कराकर ग्रामीणों को सतर्क कर रहा है और संवेदनशील घरों के लोगों को पक्के भवनों में शिफ्ट कर उनके भोजन आदि की व्यवस्था कर रहा है। ग्रामीणों की सजगता और वनकर्मियों के अथक प्रयास के समन्वय से मानव-हाथी द्वंद्व को नियंत्रित रखा जा सका है।



